
अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) और सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) ने खून के थक्के जमने (blood clots) की रिपोर्ट के बाद 13 अप्रैल को जॉनसन एंड जॉनसन की कोविड वैक्सीन पर फौरन रोक लगाने का फैसला लिया है.
FDA ने ट्विटर के माध्यम से बताया कि यह कदम वैक्सीन की जांच रिपोर्ट आने तक “सावधानी के चलते” उठाया गया है, जब तक कि वैक्सीन की समीक्षा नहीं कर ली जाती.
इस सिंगल डोज वैक्सीन से खून के थक्के के खास तरह के मामले पर चिंताओं को लेकर हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) की यूरोपीय मेडिकल एजेंसी (EMA) ने भी जांच की थी.
इससे पहले वैक्सीन के दूसरे एडवर्स रिएक्शन की रिपोर्ट के चलते अमेरिका में जानसन (Janssen) वैक्सीन की कई साइट बंद कर दी गई थीं.
सबसे बड़ी बात यह कि इस महीने के शुरू में बाल्टिमोर में उनकी एक फैक्ट्री में कंटामिनेशन के चलते वैक्सीन की लगभग 1.3 से 1.5 करोड़ डोज बर्बाद हो गईं.
आइए जानते हैं कि जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन, इसे रोकने का फैसला और कोविड वैक्सीन से जुड़े खून के थक्के जमने (blood clots) की समस्या क्या है.
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में वैक्सीन लेने वाले छह लोगों को वैक्सीन लगाए जाने के दो हफ्ते के अंदर खून के थक्के जमने के साथ एक दुर्लभ डिसऑर्डर होने के बाद यह फैसला लिया गया है.
प्रभावित 6 लोगों में से— सभी 18 से 48 साल की उम्र के बीच की महिलाएं— एक महिला की मौत हो गई और एक को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा.
इन मामलों की गहराई से पड़ताल जारी है.
सबसे पहली बात सबसे पहले, सवालों के घेरे में आई वैक्सीन पर थोड़ी जानकारी ले लें.
जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन जानसन (Janssen), अमेरिका में कोविड-19 के लिए फाइजर-बायोएनटेक (Pfizer-BioNTech) और मॉडर्ना (Moderna) की कोविड-19 वैक्सीन के बाद इमरजेंसी यूज के लिए मंजूर हुई तीसरी वैक्सीन है.
इन वैक्सीन के उलट जो एमआरएनए (mRNA) टाइप की हैं, जानसन डिसएबल्ड एडिनोवायरल वेक्टर वैक्सीन है.
सिंगल डोज वैक्सीन होने के अलावा जानसन के मामले में एक और लॉजिस्टिक लाभ यह है कि इसे 2 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच तापमान पर स्टोर किया जा सकता है, जो खासकर गर्म देशों में ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन को आसान बनाता है.
जॉनसन एंड जॉनसन ने इस मुद्दे को लेकर 13 अप्रैल को एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि उन्हें अपनी वैक्सीन के बारे में पता है कि इससे खून के थक्के जमने और प्लेटलेट्स काउंट घटने के कुछ बेहद सीमित मामले होते हैं.
उन्होंने यह भी पुष्टि की कि दोनों संबंधित स्वास्थ्य विभागों द्वारा मामलों की समीक्षा किए जाने तक उनकी वैक्सीन का अमेरिका में इस्तेमाल रोक दिया जाएगा और यूरोप में बाजार में उतारने में देरी होगी.
खून के थक्के जमना (Blood clots ) हमारे खून में कोशिकाओं और प्रोटीन का एक गुच्छा होता है, जो चोट की प्रतिक्रिया में बनता है, जिससे खून का बहना रोकने में मदद मिलती है. यह ठीक हो जाने पर आमतौर पर घुल जाता है.
इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
कभी-कभी आपके अंगों में खून के थक्के अपनी जगह से निकल कर फेफड़ों या दिमाग जैसे दूसरे अंगों में पहुंच सकते हैं और वहां यह खतरनाक साबित हो सकते हैं.
असामान्य तरीके से खून के थक्के जमने की समस्या कैंसर और डायबिटीज जैसी कुछ बीमारियों और कुछ जेनेटिक विकारों में होती हैं.
हालांकि किसी शख्स में तमाम बीमारियां और दवाएं खून के थक्के जमने के खतरे को बढ़ा सकती हैं, कोविड वैक्सीन से जुड़े खून के थक्के उस तरह के नहीं होते हैं.
एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) वैक्सीन से जुड़े खून के थक्के जमने के मामले में भी ऐसा ही था.
13 अप्रैल को एक संवाददाता सम्मेलन में एफडीए सेंटर ऑफ बायोलॉजिकल इवैल्यूएशन एंड रिसर्च के निदेशक पीटर मार्क ने दोनों वैक्सीन में खून के थक्के जमने के मामलों के बीच समानताओं का जिक्र करते हुए कहा,
उन्होंने कहा, “यही वजह है कि हमें समस्या को समझने और इसे ठीक से हल करने के लिए समय देना होगा.”
जानसन (Janssen) और एस्ट्राजेनेका (AstraZeneca) दोनों एडीनोवायरस वेक्टर प्रकार के टीके हैं.
लेकिन यह देखते हुए कि ये लक्षण बहुत दुर्लभ हैं, विशेषज्ञों का कहना है कि यह वैक्सीन जिस टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं, उसके बजाय ऐसा किसी खास शख्स की इम्यून प्रतिक्रिया की वजह से होने की ज्यादा संभावना है. मार्क द्वारा एक संभावना यह भी पेश की गई थी.
अमेरिका में अभी तक मॉडर्ना और फाइजर वैक्सीन की 1.8 करोड़ से ज्यादा डोज दी जा चुकी हैं, जिनमें से किसी में भी असामान्य खून के थक्के जमने या प्लेटलेट्स घटने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है.
भारत में 11,44,93,238 कोरोना वैक्सीन के डोज दिए जा चुके हैं, लेकिन कोवैक्सीन या कोविशील्ड वैक्सीन लेने वालों में दुर्लभ खून के थक्के जमने का कोई भी मामला सामने नहीं आया है.
डॉ. शाहिद जमील ने पहले के एक लेख में फिट से बात करते हुए कहा था, “भारत में प्रतिकूल असर से 234 लोगों के अस्पताल में भर्ती कराने और 71 मौतों के मामले सामने आए हैं. लेकिन इनमें से किसी भी मामले में डीप वेन थ्रोम्बोसिस (DVT) जो कि खून के थक्के जमना है, का मामला देखने में नहीं आया था.”
एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के मामले में भी, ज्यादातर मामले महिलाओं में सामने आए.
हालांकि, हमारे पास अभी तक बहुत पुख्ता जानकारी नहीं है, जिसके आधार पर हम निश्चितता से कह सकें कि क्या कोई उप-समूह दूसरों के मुकाबले ज्यादा रिस्क पर है.
साइड इफेक्ट किस सीमा तक होता है, और वैक्सीन से उसका संबंध अभी तक पक्के तौर पर साबित नहीं हुआ है.
लेकिन, जानसन वैक्सीन लगवाने वाले 68 लाख लोगों में से सिर्फ 6 ऐसे मामले मिलना एक दुर्लभ घटना ही मानी जाएगी.
इस खबर के सामने आने के बाद कई विशेषज्ञ वैक्सीनेशन को लेकर विवाद को शांत करने आगे आए हैं, जिनमें यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज के निदेशक और अमेरिकी राष्ट्रपति के मुख्य चिकित्सा सलाहकार एंथोनी फॉसी भी शामिल हैं.
यह देखते हुए कि ये दुर्लभ खून के थक्के जमना सामान्य खून के थक्के जमने से अलग है, विशेषज्ञ इसका खुद इलाज न करने की सलाह देते हैं.
पीटर मार्क्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली ब्लड थिनर (खून पतला करने की दवा) हेपरिन का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी, क्योंकि ये “जबरदस्त नुकसान पहुंचा सकती है, या इसके नतीजे जानलेवा हो सकते हैं.”
अमेरिका के साथ-साथ यूरोप के विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि इसके बजाय अगर आप दशा से जुड़े किसी भी लक्षण का अनुभव करते हैं तो डॉक्टरी मदद हासिल करने पर ध्यान देने की जरूरत है.
मार्क्स इस बारे में कहते हैं कि साइड इफेक्ट के दुर्लभ योग का मतलब है कि मरीजों को पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट की जरूरत होगी.
जॉनसन एंड जॉनसन ने अपने बयान में आम सलाह दी है कि जिसने भी वैक्सीन ली है और वैक्सीन लेने के बाद तीन हफ्ते के अंदर ऐसे लक्षण दिखते हैं तो डॉक्टर से संपर्क करें.
तेज सिरदर्द
पेट में दर्द
पांव में दर्द
सांस लेने में कठिनाई
इन बताए गए लक्षणों के अलावा, यूरोपियन मेडिकल एजेंसी (EMA) ने आपको आगे बताए लक्षण अनुभव होने पर फौरन मेडिकल सहायता हासिल करने की सलाह दी है:
सीने में दर्द
पांव में सूजन
पेट (आंत) में लगातार दर्द
न्यूरोलॉजिकल समस्या, जिसमें धुंधला दिखना भी शामिल है
इंजेक्शन लगाने की जगह से दूर स्किन के नीचे खून के छोटे धब्बे
जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन के इस्तेमाल पर रोक के कदम से अमेरिका में ऐसे समय में वैक्सीनेशन अभियान को तगड़ा झटका लग सकता है, जबकि देश धीरे-धीरे पाबंदियां खत्म करने और लॉकडाउन से निकलने की तैयारी कर रहा है, और साथ ही साथ कुछ राज्यों में मामले बढ़ रहे हैं.
एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को लेकर विवाद के साथ ही यह मामला, न सिर्फ अमेरिका बल्कि दुनिया भर में वैक्सीन को लेकर हिचकिचाहट की समस्या को गहरा कर सकता है.
(यह लेख The New York Times, Business Insider और IANS के इनपुट मिलाकर लिखा गया है.)
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