CO2 और दूसरी हानिकारक गैसों से नहीं बचाते एयर प्यूरिफायर,क्या करें
आमतौर पर एयर प्यूरिफायर पीएम 2.5 को ही घटाने में मददगार होते हैं.
आमतौर पर एयर प्यूरिफायर पीएम 2.5 को ही घटाने में मददगार होते हैं.(फोटो: iStock)

CO2 और दूसरी हानिकारक गैसों से नहीं बचाते एयर प्यूरिफायर,क्या करें

प्रदूषित हवा के प्रकोप से बचने के लिए आप क्या-क्या कर रहे हैं? एंटी पॉल्यूशन मास्क, इंडोर प्लांट्स, इम्यूनिटी बढ़ाने वाली चीजें लेना, बाहर निकलने से बचना और घर या ऑफिस के अंदर की हवा साफ करने के लिए एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल.

लेकिन हम आपको बता दें कि एयर प्यूरिफायर रखकर भी आप बेफिक्र नहीं हो सकते.

BreatheEasy कंसल्टेंट्स के CEO बरुण अग्रवाल बताते हैं कि मार्केट में मौजूद 98 प्रतिशत से ज्यादा एयर प्यूरिफायर क्लोरिन, डाइऑक्सिन, सल्फर डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन सल्फाइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, अमोनिया जैसी हानिकारक गैसें नहीं हटाते हैं क्योंकि 50 ग्राम के कार्बन फिल्टर से इन गैसों को नहीं हटाया जा सकता है.

साथ ही एयर प्यूरिफायर कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को घटाने की क्षमता भी नहीं रखते. ऐसे में आपके ऑफिस या घर में बेहतर वेंटिलेशन के अभाव में कार्बन डाइऑक्साइड खतरनाक स्तर तक पहुंच सकती है.

CO2 लेवल ज्यादा मतलब कम प्रोडक्टिविटी

एयर प्यूरिफायर के लिए खिड़की, दरवाजे बंद करने की जरूरत होती है और किसी बंद कमरे में कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल बहुत तेजी से बढ़ता है, खासकर जहां ज्यादा लोग मौजूद हों.

ब्रीदईजी कंसल्टेंट्स की ओर से एक साल तक अप्रैल 2018 और मार्च 2019 के बीच की गई एक स्टडी के दौरान कई घरों में कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल 750 पीपीएम की सुरक्षित सीमा के मुकाबले 3,900 पीपीएम से अधिक पाया गया था.

इस स्टडी में कार्बन डाइऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों को दिल्ली-NCR में घरों के अंदर मुख्य प्रदूषक पाया गया, जो कि अपनी सुरक्षित सीमा से बहुत अधिक थे.
 किसी बंद कमरे में कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल बहुत तेजी से बढ़ता है
किसी बंद कमरे में कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल बहुत तेजी से बढ़ता है
(फोटो: फिट)
हमने कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल 2000-3000 पीपीएम तक देखा है, ये बहुत हानिकारक है क्योंकि उससे सिर दर्द होता है, सुस्ती आती है, ब्रेन का फंक्शन कम हो जाता है और लोगों की प्रोडक्टिविटी कम हो जाती है.
बरुण अग्रवाल
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सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट और मैक्स हॉस्पिटल में कंसल्टेंट डॉ शरद जोशी बताते हैं कि कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल बढ़ना सुरक्षित नहीं है.

हवा में CO2 लेवल और संभावित स्वास्थ्य समस्याएं:

250 - 350 ppm: बाहर की हवा में CO2 का सामान्य लेवल
350 - 1,000 ppm: बंद जगहों पर जहां वेंटिलेशन हो
1,000 - 2,000 ppm: इस लेवल पर लोगों को सुस्ती लग सकती है और इसे खराब हवा माना जाता है
2,000 - 5,000 ppm: इस लेवल पर सिर दर्द, नींद, आलस, सांस लेने में कठिनाई, किसी चीज में ध्यान ना लगा पाना, हार्ट रेट बढ़ना, मिचली जैसी समस्या हो सकती हैं.
5,000 ppm: ये एयर कंडिशन सामान्य नहीं होती. ऐसे में टॉक्सिसिटी या ऑक्सीजन की कमी हो सकती है.
40,000 ppm: ऑक्सीजन की कमी के कारण ये लेवल तुरंत हानिकारक है

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कैसे करें एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल?

डॉ शरद जोशी बताते हैं कि मार्केट में कई तरह के एयर प्यूरिफायर मौजूद हैं, इसलिए आपको इनका चुनाव करते वक्त कुछ बातों का ख्याल रखना चाहिए.

जैसे- एयर प्यूरिफायर में हेपाफिल्टर्स मौजूद हों, उसकी टेक्नोलॉजी इलेक्ट्रोस्टैटिक या आयनाइजर ना हो क्योंकि जिन एयर प्यूरिफायर में इलेक्ट्रोस्टैटिक या आयनाइजिंग टेक्नोलॉजी इस्तेमाल होती है, वो एक तरफ भले ही हवा में मौजूद प्रदूषकों को कम कर रहे हों, लेकिन दूसरी ओर ये वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड और ओजोन भी प्रोड्यूस करते हैं.  
डॉ शरद जोशी, सीनियर पल्मोनोलॉजिस्ट

बरुण अग्रवाल कहते हैं कि बाजार का कोई भी एयर प्यूरिफायर कार्बन डाइऑक्साइड लेवल को नहीं घटा सकता है.

इसके लिए हमें बाहर की ताजी हवा अंदर लाने की जरूरत है, जो पूरी तरह से स्वच्छ हो. उसके लिए ये ध्यान देना होता है कि जो फिल्टर इस्तेमाल हो, वो बाहर के सिर्फ पर्टिकुलेट मैटर को नहीं बल्कि हानिकारक गैसों को भी अच्छी तरह से साफ कर सके.
बरुण अग्रवाल
वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था से कार्बन डाइऑक्साइड लेवल को बेहतर  रखा जा सकता है.
वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था से कार्बन डाइऑक्साइड लेवल को बेहतर रखा जा सकता है.
(फोटो: सुमित बडोला)

वो बताते हैं, “हमने IQAir की मशीन के साथ समाधान निकाला है और हम चाहते हैं कि दूसरे भी इसी तरह का समाधान निकालें.”

हमने दीवार में एक छोटा सा छेद किया और एक फ्लेक्सिबल डक्ट को उस मशीन से कनेक्ट कर दिया, जब वो मशीन चालू करते हैं, वो बाहर से हवा खींचता है और उसमें फिल्टर के चार लेयर हैं, जो अल्ट्रा फाइन पार्टिकल तक हटा देता है और हानिकारक गैसों को भी फिल्टर कर देता है. इस तरह बाहर से साफ हवा अंदर आती है और CO2 का लेवल भी मेंटेन रहता है.  

डॉ शरद जोशी एयर प्यूरिफायर के साथ ही घर के अंदर स्नेक प्लांट, एरिका पाल्म, मनी प्लांट और तुलसी जैसे इंडोर प्लांट्स लगाने की सलाह देते हैं.

कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि अगर आप साफ हवा के लिए एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो कार्बन डाइऑक्साइड लेवल को कंट्रोल करने और हानिकारक गैसों को फिल्टर करने के लिए बेहतर वेंटिलेशन के साथ अच्छे एयर प्यूरिफायर का चुनाव करना जरूरी है क्योंकि एक समस्या सुलझाने के लिए दूसरी समस्या बढ़ाने में कोई समझदारी नहीं है.

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