स्टडी: COVID-19 के बीच भारत में कई युवा धूम्रपान छोड़ने की राह पर

धूम्रपान छोड़ने की इच्छा रखने वालों की संख्या बढ़ी

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कोरोना वायरस फेफड़ों पर भी वार करता है, ऐसे में स्मोकिंग खतरे को बढ़ाता है
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फाउंडेशन फॉर ए स्मोक-फ्री वर्ल्ड की ओर से किए गए एक हालिया सर्वे में पता चला है कि COVID-19 महामारी के बीच धूम्रपान करने वालों में इसे छोड़ने की इच्छा बढ़ रही है.

कई देशों में कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन ने लोगों के लिए सिगरेट खरीदना मुश्किल कर दिया है. धूम्रपान करने वालों के लिए COVID -19 से संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों की बढ़ती संख्या को लेकर भी कई स्टडी आई है.

भारत, अमेरिका, यूके, इटली और दक्षिण अफ्रीका में तंबाकू और निकोटिन का इस्तेमाल करने वाले 6,801 लोगों के बीच सर्वे किया गया. सर्वे में पाया गया कि सिर्फ भारत में सर्वे में शामिल 1,500 धूम्रपान करने वालों में से दो-तिहाई धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं. उनमें से कुछ का ये भी मानना ​है कि धूम्रपान कोरोना वायरस से संक्रमित होने के खतरे को बढ़ा सकता है.

25-39 की उम्र वालों की तुलना में 18-24 की उम्र के यंग एडल्ट्स स्मोकिंग छोड़ने के लिए ज्यादा इच्छुक दिखे.

लॉकडाउन के दौरान 18 से 24 साल के 72 फीसदी युवाओं और 25 से 39 साल के 69 फीसदी धूम्रपान छोड़ने की कोशिश कर चुके हैं.

फाउंडेशन फॉर ए स्मोक-फ्री वर्ल्ड के प्रेसिडेंट डॉ. डेरेक याच ने कहा,

"हमने जिन देशों में सर्वे किया है वहां तनाव और चिंता बढ़ने की रिपोर्ट एक सी है. लेकिन भारत में प्रतिक्रिया थोड़ी अलग है- खासतौर से तंबाकू और निकोटिन का सेवन कर रहे युवा इसे छोड़ने और इसके लिए महत्वपूर्ण प्रयासों को अपनाने के लिए तैयार दिखे."

भारत में सर्वे में शामिल धूम्रपान करने वालों में से 66% ने संकेत दिया कि उन्होंने इसे छोड़ने पर विचार किया था और 63% ने वास्तव में छोड़ देने का प्रयास किया.

इस बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर परेशानियां बढ़ रही हैं.

स्टडी के मुताबिक, 36% भारतीयों ने अपने मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने के बारे में बताया. ये आंकड़े भारत के मुकाबले अमेरिका (42%) ,यूनाइटेड किंगडम (39%) में ज्यादा लेकिन इटली (24%) और दक्षिण अफ्रीका (24%) में कम है.

भारत में, बड़े शहरों में स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र को अपनाया जा रहा है. प्रमुख महानगरों में 50%, टियर 2 शहरों में 40% और टियर 3 शहरों में 37% तक मेडिटेशन अपनाया जा रहा है.

स्टडी में ये भी सामने आया है कि बाकी देशों की तुलना में भारत में तंबाकू और निकोटिन का सेवन कर रहे लोगों में COVID-19 के जोखिम से बचने के लिए एक्सरसाइज (64%), सांस लेने के व्यायाम (58%), मेडिटेशन (58%) और योग (55%) जैसे मैकेनिज्म अपनाने में बढ़त देखी जा रही है.

डेटा से पता चलता है कि 48% धूम्रपान करने वालों का मानना है कि धूम्रपान COVID-19 के खतरे या इससे गंभीर रूप से बीमार होने के जोखिम को बढ़ाता है. ऐसे में कई लोग धुआं रहित तम्बाकू सेवन पर जोर दे रहे हैं.

वहीं स्टडी करने वालों का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी ने लोगों का व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित किया है.

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