रोज 70000 मरीजों को रेमडेसिविर की जरूरत पर अगले सप्ताह तक किल्लत

3.75 लाख दैनिक मामलों को ध्यान में रखते हुए, कम से कम 70,000 मरीजों को रेमेडिसविर इंजेक्शन की जरूरत होगी.

Updated
<div class="paragraphs"><p>COVID-19: अगले सप्ताह तक जारी रहेगी रेमडेसिविर दवा की किल्लत</p></div>
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देश में कोविड संबंधित दवाओं की भारी कमी है. रेमडेसिविर की किल्लत अगले सप्ताह तक रहेगी. हालांकि, इसकी ब्लैक मार्केटिंग को देखते हुए, देश के शीर्ष केमिस्ट बॉडी ने आश्वासन दिया है कि मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों की तरफ से महत्वपूर्ण जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति में भारी बढ़त होगी और भारत में अगले सप्ताह तक ये संकट खत्म होगा.

देश भर के 9.50 लाख से ज्यादा केमिस्टों का प्रतिनिधित्व करने वाले ऑल इंडिया ऑगेर्नाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के सचिव, राजदीप सिंघल ने कहा, "कोविड के मरीजों के इलाज से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण दवाओं की मांग में काफी उछाल आया है. अब सिप्ला या कैडिला जैसी कंपनियों ने शीशियों का उत्पादन बढ़ा दिया है. हम वादा करते हैं कि आपूर्ति पर्याप्त होगी."

गंभीर रूप से बीमार कोविड मरीजों के लिए जीवन रक्षक दवा रेमडेसिविर की आपूर्ति में कमी और देरी का कारण बताते हुए, AIOCD के अध्यक्ष जे.एस. शिंदे ने कहा कि इस दवा के एक ही बैच के उत्पादन में करीब 15 से 16 दिन लगते हैं.

उन्होंने कहा, "रेमडेसिविर का तुरंत उत्पादन नहीं किया जा सकता है. इसके उत्पादन में 15 दिनों का साइकिल और पैकेजिंग और रोल आउट में 3 से 4 दिन लग जाते हैं. लेकिन अब कई मैन्यूफैक्चरर (करीब 7 से 8) को लाइसेंस मिला है. इससे उत्पादन में तेजी आएगी. फिलहाल रेमडेसिविर का वितरण संबंधित निमार्ताओं से इसके वितरकों के लिए है. ये स्टॉक राज्य सरकार की देखरेख में वितरकों से सीधे अस्पतालों में जाता है. आपूर्ति की इस श्रृंखला में केमिस्ट शामिल नहीं हैं, इसलिए उन्हें जमाखोरी के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता."

राजीव सिंघल ने गंभीर कोविड मरीजों के लिए जीवन रक्षक दवाओं की बड़े पैमाने पर जरूरत के बारे में बताते हुए कहा कि भारत में करीब 3.75 लाख दैनिक मामलों को ध्यान में रखते हुए, कम से कम 70,000 मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन की जरूरत होगी.

AIOCD के महासचिव ने कहा, "जैसा कि हरेक मरीज को 6 शीशियों(वायल) की जरूरत होती है, देश को हर दिन 4 लाख से ज्यादा रेमडेसिविर इंजेक्शनों की जरूरत होगी. हमें उम्मीद है कि ज्यादातर मैन्यूफैकचरर ने अपने उत्पादन में तेजी ला दी है, रेमडेसिविर की कम आपूर्ति का संकट खत्म हो जाएगा."

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