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COVID-19: क्या बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू करने में हम देरी कर रहे हैं?

भारत में बच्चों का COVID-19 वैक्सीनेशन शुरू करने को लेकर क्या चल रहा है?

Updated
<div class="paragraphs"><p>COVID-19 vaccines for children in India </p></div>
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भारत में जाइडस कैडिला की वैक्सीन ZyCoV-D को 12 साल और इससे ज्यादा की उम्र वालों के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से अगस्त में ही मंजूरी मिल चुकी है. इसके अलावा सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमिटी ने 2 से 18 साल की आबादी के लिए भारत बायोटेक की Covaxin को मंजूरी दिए जाने की सिफारिश पिछले महीने अक्टूबर में ही कर दी थी. लेकिन न तो अभी ZyCoV-D उपलब्ध हुई है और न ही बच्चों के लिए Covaxin को DCGI की मंजूरी मिली है.

क्या हम बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू करने में देरी कर रहे हैं? स्कूल और कॉलेज खुलने के साथ इस मामले में हमारी नीति क्या होनी चाहिए और भारत के सामने क्या चुनौतियां हैं?

COVID-19 के खिलाफ बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू करना चाहिए या नहीं, इसे लेकर अलग-अलग देशों की राय बंटी हुई है. अमेरिका में 5 साल से 11 साल के बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू हो चुका है.

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कोलंबिया, अर्जेंटीना और चीन में 3 साल के बच्चों को भी कोरोना वैक्सीन दी जा रही है, लेकिन दुनिया भर के कई देश अभी बच्चों के कोरोना वैक्सीनेशन में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहते हैं, वहीं कई देशों में पहले वयस्क आबादी का वैक्सीनेशन ही चुनौती है.

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक वयस्क और किशोर आबादी के वैक्सीनेशन में तेजी करने वाला इजराइल छोटे बच्चों के वैक्सीनेशन सावधानी बरत रहा है. वहीं ऑस्ट्रेलिया 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कोविड वैक्सीन को मंजूरी देने से पहले अमेरिका के रियल-वर्ल्ड अनुभव का इंतजार कर रहा है.

बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीनेशन की शुरुआत को लेकर 11 नवंबर को टाइम्स नाउ के एक कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि यह निर्णय बहुत सावधानी से लेने की जरूरत है.

हम बच्चों को कोरोना वैक्सीन लगाने में जल्दबाजी नहीं करना चाहते. सरकार विशेषज्ञ की राय लेगी और उसके अनुसार जाएगी.
मनसुख मंडाविया, स्वास्थ्य मंत्री

क्या हम बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू करने में देरी कर रहे हैं?

क्या वयस्कों की तुलना में बच्चों के लिए COVID-19 वैक्सीनेशन शुरू होने में देरी हो रही है? इस सवाल के जवाब में अशोका यूनिवर्सिटी में फिजिक्स और बायोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. गौतम मेनन फिट से कहते हैं कि इस समय वयस्कों की तुलना में बच्चों में वैक्सीन के लिए बहुत कम डेटा है.

यह देखते हुए, सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है और जल्दबाजी में बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू नहीं किया जाना चाहिए. बच्चों में COVID-19 के प्रतिकूल परिणामों को रोकने के संदर्भ में वैक्सीनेशन के फायदों के बारे में अभी कोई स्पष्ट डेटा नहीं है क्योंकि बच्चों में संक्रमण काफी हद तक हल्के होते हैं.
डॉ. गौतम मेनन, फिजिक्स और बायोलॉजी प्रोफेसर, अशोका यूनिवर्सिटी

पिछले महीने क्विंट को दिए एक इंटरव्यू में वायरोलॉजिस्ट डॉ. गगनदीप कांग, जो नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन (NTAGI) की सदस्य भी हैं, ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि स्वस्थ बच्चों को अभी कोरोना वैक्सीन की जरूरत है.

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भारत में बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन को लेकर क्या चल रहा है?

जाइडस कैडिला की तीन डोज वाली Covid-19 वैक्सीन ZyCoV-D को भारत के ड्रग रेगुलेटर की ओर से 20 अगस्त को 12 और इससे ज्यादा उम्र के लोगों के लिए मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन 14 नवंबर को न्यूज एजेंसी PTI की एक रिपोर्ट के मुताबिक इसे अभी सिर्फ वयस्कों को ही दिया जाएगा.

टाइम्स ऑफ इंडिया की 9 नवंबर की इस रिपोर्ट में एक सीनियर अधिकारी के हवाले से बताया गया कि कोरोना के खिलाफ बच्चों का वैक्सीनेशन भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को अप्रूवल मिलने के बाद शुरू किया जाएगा क्योंकि जाइडस कैडिला की तीन-डोज वाली वैक्सीन की पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित होनी चाहिए.

इसके अलावा ZyCoV-D बिना सिरिंज के एप्लिकेटर गन से दिया जाना है, जिसकी पर्याप्त व्यवस्था के साथ हेल्थकेयर वर्कर्स को इसकी ट्रेनिंग भी जरूरी है. वहीं ये वैक्सीन 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए नहीं है.

2 साल और उससे ज्यादा की उम्र वाले बच्चों के लिए COVAXIN

सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमिटी ने पिछले महीने 12 अक्टूबर को 2-18 एज ग्रुप के लिए भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन देने की सिफारिश की थी, लेकिन ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से इमरजेंसी यूज ऑथराइजेशन मिलने में अभी कुछ हफ्ते लग सकते हैं.

कोविड-19 वैक्सीन के लिए अन्य अप्रूवल के विपरीत, ड्रग रेगुलेटर ने सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमिटी की सिफारिश के आधार पर कोवैक्सीन को तुरंत मंजूरी नहीं दी है. इसके बजाय, यह स्वतंत्र रूप से पीडियाट्रिक कोवैक्सीन ट्रायल के डेटा की विस्तृत जांच कर रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी 15 नवंबर की रिपोर्ट में एक शीर्ष सरकारी सूत्र के हवाले से बताया कि DCGI की ओर से बच्चों पर Covaxin के क्लीनिकल ट्रायल से जुड़े दो विषयों पर अतिरिक्त जानकारी मांगी गई है-

  1. बच्चों की संख्या और अलग-अलग आयु वर्ग

  2. इन एज ग्रुप में टीकाकरण के बाद होने वाली प्रतिकूल घटनाएं क्या थीं

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सूत्रों के मुताबिक इसके जवाब में, भारत बायोटेक ने "हाल ही में" दवा नियामक को इससे संबंधित डेटा जमा किया है और बच्चों के लिए कोवैक्सीन को DCGI का अप्रूवल नवंबर के अंत तक मिलने की उम्मीद है.

ड्रग रेगुलेटर के अंतिम निर्णय लेने के बाद ही नेशनल टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन इम्यूनाइजेशन (NTAGI) राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान में बच्चों में कोवैक्सीन के उपयोग के लिए गाइडलेंस जारी करेगा.

बच्चों के COVID वैक्सीनेशन की क्या रणनीति होनी चाहिए?

प्रोफेसर डॉ. गौतम मेनन कहते हैं कि कोरोना के खिलाफ बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू करने में हम तब तक इंतजार कर सकते हैं जब तक कि वयस्क आबादी में 70-80% लोगों को दूसरी डोज नहीं लग जाती है.

डॉ. कांग ने भी कहा था कि वयस्कों का टीकाकरण पूरा होने तक हमारे पास बच्चों के संबंध में दूसरों देशों से भी बेहतर डेटा मिल जाएगा कि किस तरह की वैक्सीन बच्चों पर कैसा काम कर रही है.

जहां तक मसला स्कूल खुलने का है, डॉ. मेनन कहते हैं कि भारत और अन्य देशों के आंकड़े सुझाते हैं कि स्कूल संभावित स्थल हैं, जहां बच्चे संक्रमित हो सकते हैं लेकिन गंभीर बीमारी और मौत से बचाने में वैक्सीन का असर स्पष्ट रूप से वयस्कों में देखा गया है.

ऐसे में वयस्क टीकाकरण जारी रखना, शायद स्कूल जाने वाले बच्चों के परिवारों को प्राथमिकता देना, निकट भविष्य में हमारी रणनीति रहनी चाहिए.
डॉ. गौतम मेनन, फिजिक्स और बायोलॉजी प्रोफेसर, अशोका यूनिवर्सिटी

डॉ. कांग के मुताबिक पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे हाई रिस्क वाले बच्चों को हमें वैक्सीनेट करने के बारे में सोचना चाहिए क्योंकि ये कुछ सुरक्षा दे सकता है, लेकिन ये बहुत निगरानी के साथ किया जाना चाहिए.

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