वेपिंग का मामला क्या है? क्या इसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए? और किशोर इससे कैसे दूर रह सकते हैं?
वेपिंग का मामला क्या है? क्या इसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए? और किशोर इससे कैसे दूर रह सकते हैं?(फोटो: iStock)
  • 1. ई-सिगरेट क्या है?
  • 2. वेपिंग में बच्चों की दिलचस्पी, स्मोकर्स की एक नई पीढ़ी
  • 3. ई-सिगरेट पर भारत की स्थिति
  • 4. क्या ई-सिगरेट तंबाकू सिगरेट के मुकाबले कम खतरनाक है?
भारत में ई-सिगरेट पर पाबंदी लगनी चाहिए या नहीं?

भारत में एक बार फिर नए सिरे से ई-सिगरेट या इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) को बढ़ावा देने का प्रयास हो रहा है.

31 मई को, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने भारत में ENDS पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने के लिए श्वेत पत्र जारी किया.

इसके जवाब में 62 ग्लोबल एक्सपर्ट्स और भारत में ENDS के व्यापार प्रतिनिधियों (TRENDS, वितरकों, आयातकों, ENDS के खुदरा विक्रेताओं का एक समूह) ने अब ICMR के रुख पर सवाल उठाया है.

साल 2000 की शुरुआत में भारत में ई-सिगरेट के शुरू होने के बाद से ही वैपिंग के फायदों को साबित करने और खारिज करने का एक लंबा इतिहास रहा है. अगस्त 2018 में, स्वास्थ्य मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) के खिलाफ एक एडवाइजरी जारी की. इसमें निकोटिन को स्वास्थ्य पर कई प्रतिकूल प्रभावों के साथ ट्यूमर को बढ़ावा देने वाला बताया गया. इसके बाद भारत में 16 राज्यों में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगा दिया गया.

मार्च में, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सभी दवा नियंत्रकों को अपने अधिकार क्षेत्र में ENDS के निर्माण, बिक्री, आयात और विज्ञापन की अनुमति नहीं देने का निर्देश दिया. धूम्रपान के वैकल्पिक माध्यमों पर प्रतिबंध लगाना मोदी सरकार के 100 दिन के एजेंडे में है. दिल्ली हाईकोर्ट में 22 अगस्त को ई-सिगरेट पर प्रतिबंध के मामले के सुनवाई थी.

  • 1. ई-सिगरेट क्या है?

    वेपिंग का मामला क्या है? क्या इसे प्रतिबंधित किया जाना चाहिए? और किशोर इससे कैसे दूर रह सकते हैं?
    ये आकार में कई तरह के होते हैं.
    (फोटो: iStockphoto)

    ई-सिगरेट बैटरी से चलने वाली डिवाइस है, जिसमें अलग-अलग मात्रा और सांद्रता (concentrations) में वाष्पीकृत (vaporized) निकोटिन होती है. हालांकि इसमें किसी भी ड्रग को डाला जा सकता है. ये आकार में कई तरह के होते हैं. ये पेन, रेगुलर सिगरेट और यहां तक कि यूएसबी ड्राइव की तरह आकर्षक और छोटे दिख सकते हैं.

    ई-सिगरेट और सामान्य सिगरेट के बीच अंतर ये है कि ई-सिगरेट में तंबाकू और सामान्य सिगरेट में पाए जाने वाले कई दूसरे हानिकारक रसायन नहीं होते है.

    यही वजह है कि इन्हें पारंपरिक धूम्रपान के कम खतरनाक विकल्प के रूप में देखा जाता है. इसे धूम्रपान करने वालों के बीच तंबाकू पर निर्भरता को कम करने के तरीके के रूप में भी देखा जाता है.

    लेकिन स्टडीज का कहना है कि नियमित रूप से ई-सिगरेट पीना फायदे से ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है. 2015 में अमेरिका में सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के रिसर्च के अनुसार, ई-सिगरेट पीने वाले 58.8 फीसदी लोग पूरी तरह से रेगुलर धूम्रपान नहीं छोड़ पाते हैं.

    इसके अलावा, 2008 में, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा था कि ई-सिगरेट की मार्केटिंग धूम्रपान के एक सुरक्षित विकल्प के रूप में नहीं की जानी चाहिए क्योंकि इसका समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं है.

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