भारत: COVID केस में उछाल और नए वेरिएंट- डॉ गंगाखेड़कर से समझिए

क्या कोरोना केस में उछाल के पीछे नए वेरिएंट्स हैं? डॉ आर आर गंगाखेड़कर से जानिए

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पिछले 2 हफ्तों में भारत के 6 राज्यों में कोरोना केस मिलने की धीमी और लगभग स्थिर रफ्तार में आई तेजी ने दूसरी लहर को लेकर चिंता बढ़ा दी है. महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पंजाब और जम्मू और कश्मीर में कोरोना केस बढ़ने का कारण क्या है? हालांकि केरल में धीरे-धीरे ट्रेंड नीचे की ओर जाता दिख रहा है.

क्या इस उछाल के पीछे कोरोना के नए वेरिएंट्स हैं? ये नए स्वदेशी वेरिएंट्स क्या हैं और हमें कितना चिंतित होना चाहिए? भारत जीनोमिक सर्विलांस में कितना आगे है? इस सब पर चर्चा करने के लिए, हमने उस साइंटिस्ट से बात की, जो भारत में कोरोना महामारी के शुरुआती महीनों में ICMR का चेहरा थे, एपिडेमियोलॉजी एंड कम्यूनिकेबल डिजीज के पूर्व प्रमुख- डॉ आरआर गंगाखेड़कर.

आप भारत में वायरस की स्थिति को कहां देखते हैं? क्या हम वास्तव में एक दूसरी लहर शुरू होते देख रहे हैं?

ये कहना जल्दबाजी होगी कि दूसरी लहर की शुरूआत है या नहीं. हमें ये समझने की जरूरत है कि सफल लॉकडाउन के कारण, लंबे समय तक लॉकडाउन की वजह से एपिडेमियोलॉजिकल कर्व बहुत देर से शुरू हुआ. इससे हमें करीब 5-6 महीने का फायदा मिला. अब ये गिरावट पर है लेकिन छोटे पॉकेट्स में आप इस संक्रमण को दोबारा उठते हुए देख रहे हैं. क्या ये दूसरी लहर का संकेत है? हम अब तक निश्चितता के साथ नहीं कह सकते हैं और इसका कारण बहुत सरल है- हमारा देश बहुत बड़ा देश है.

अगर आप इस महामारी को देखते हैं, तो आपको 3 चीजें देखने की जरूरत है - जनसंख्या घनत्व, मोबिलिटी(गतिशीलता) और पलायन. अब जब हम इनकी बात करते हैं तो आप पाएंगे कि अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में वल्नरैबिलिटी के अलग-अलग कारक होंगे. और इस तरह की भिन्नता मौजूद होने के बावजूद कई छोटे क्षेत्र होंगे जहां लॉकडाउन हट रहे हैं, तो आप पाएंगे कि केस में थोड़ी बढ़त हुई है. जब तक लगातार एक समान ट्रेंड नहीं दिखता तब तक आपको ये नहीं कहना चाहिए कि ये दूसरी लहर का उदय है.

लेकिन ये वो वक्त है जहां हम लोगों को सावधानी जारी रखनी होगी कि उन्हें COVID उपयुक्त व्यवहार का पालन करना जारी रखना होगा, क्योंकि अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो हमें दूसरी लहर को झेलना होगा.

दुनियाभर में वायरस गिरावट पर है, यहां तक​ कि ब्राजील में, एक महीने में, वायरस डिक्लाइन करेगा. हमें ये सुनिश्चित करना चाहिए कि भारत ऐसी जगह न बने जहां दूसरी लहर शुरू हो जाए, फिर लोगों को ये चिंता होगी कि क्या ये दुनिया के बाकी हिस्सों में भी फैलेगा?

3 राज्यों में 2 नए वेरिएंट का पता लगाया गया है. कई म्यूटेशन में से ये म्यूटेशन अहम कहे जा रहे हैं. क्या आप ‘N440K’ और ‘E484K’ वेरिएंट के बारे में समझा सकते हैं?

देखिए हम ‘N440K’ वेरिएंट के बारे में बहुत कुछ नहीं जानते हैं कि क्या इसका किसी प्रकार का क्लीनिकल महत्व है? ये ट्रांसमिशन क्षमता को प्रभावित करेगा या गंभीर बीमारी की ओर ले जाएगा, हमें इस बारे में कुछ भी पता नहीं है.

वेरिएंट ‘E484K’ को लेकर कुछ सबूत हैं कि शायद सामान्य इम्यून रिस्पॉन्स जो इसके खिलाफ एंटीबॉडी पैदा करते हैं, इस वेरिएंट के खिलाफ पर्याप्त न हों, जिसका मतलब है कि अगर आपके आसपास ये वेरिएंट है, तो उस क्षेत्र में रिइंफेक्शन देखा जा सकता है.

मुझे नहीं लगता कि हमारे पास ये कहने के लिए पर्याप्त सबूत हैं कि जो नए मामले सामने आ रहे हैं, वे नए वेरिएंट के कारण हो रहे हैं. वायरस को प्रसार का दोषी बताने की बजाय ये समझना होगा कि आप COVID उपयुक्त व्यवहार का पालन नहीं कर रहे हैं.

भारत में जीनोम सीक्वेंसिंग और सर्विलांस की गति से आप कितने संतुष्ट हैं? हम सैंपल में से कम से कम 5% का टेस्ट करने में सक्षम होना चाहते हैं, लेकिन हम आसपास भी नहीं हैं?

देखिए जब आप 5% सैंपल लेते हैं, तो आपके पास आने वाले 100 सैंपल में से 5 को चुना जाता है. अब जब आप 5% लेते हैं, तो आपको ये याद रखना चाहिए कि एक वेरिएंट को लेने की संभावना कम बनी हुई है. अब हमें जिस चीज के बारे में चिंतित होना चाहिए वो ये कि हम सिर्फ वेरिएशन का पता न लगाएं बल्कि अहम वेरिएशन का पता लगाए- क्लीनिकल महत्व वाले वेरिएंट, ऐसे वेरिएंट जिनमें स्पाइक प्रोटीन में इतना बदलाव होता है कि वे वैक्सीन से पैदा होने वाले इम्यून रिस्पॉन्स से बच सकते हैं. आप ये कैसे करते हैं? ऐसा करने के सर्वोत्तम तरीकों में से एक है आरटी-पीसीआर टेस्ट. आरटी-पीसीआर टेस्ट में जब मरीज को असल में कोविड संक्रमण होता है, लेकिन उसके स्पाइक प्रोटीन जीन का पता नहीं चलता तो इसे लेकर चिंता करने की जरूरत है. इस तरह आप अपने काम को कम से कम करते हैं लेकिन अपने आउटपुट को अधिकतम करते हैं.

दूसरा मुद्दा जो महत्वपूर्ण है, इस विशेष वायरस के खिलाफ कोई ज्ञात एंटी-वायरल नहीं है. ये वायरस क्यों म्यूटेट कर रहा है, ये एक पहेली है. शायद इसका कारण इम्यून प्रेशर है जो वायरस के ऊपर पड़ता है. अब इम्यून प्रेशर कैसे आता है? अगर मैं किसी व्यक्ति को बार-बार कॉन्वेलेसेंट प्लाज्मा देता हूं, तो वायरस को कई न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडीज की चुनौती का सामना करना पड़ेगा जो अलग-अलग इंसानों के शरीर के पिछले संक्रमण के कारण आ रहे हैं, और अब वायरस उसी में कमजोरी खोजने की कोशिश करेंगे और म्यूटेट करेंगे. ये अहम है कि हम जानते हैं कि कॉन्वेलेसेंट प्लाज्मा बिल्कुल भी उपयोगी नहीं है, हम जानते हैं कि अगर हमें ये देना है तो इसे पहले 2 या 3 दिनों में देना होगा. हमें इससे बचना चाहिए. सभी को समझना होगा कि बेवजह कॉन्वेलेसेंट प्लाज्मा का इस्तेमाल न करें और बार-बार न करें.

आपने इस वायरस और इसके प्रभाव को करीब से देखा है, आप इसे कैसे खत्म होते हुए देखते हैं?

ये एक बहुत ही कठिन सवाल है. ये संभव है कि मैं वायरस द्वारा गलत साबित हो सकता हूं. लेकिन मुझे दृढ़ विश्वास है कि इस महामारी को समाप्त करना हमारे हाथ में है. ये एक खत्म होने वाला संक्रमण बनने जा रहा है. लेकिन इसमें उस तरह का प्रकोप नहीं दिखेगा जो दुनिया भर में देखा गया.

ये मौका हमारे साथ है. एक महीने में ब्राजील के भी मामलों में कमी आएगी अगर आप उनका कर्व देखें.

मुझे लगता है कि एक महीने बाद आपके पास ये सुनिश्चित करने के लिए सबसे उपयुक्त समय होगा कि कोई नया मामला न हो. अगर हम अपने COVID उपयुक्त जारी रखते हैं, तो हम इस विशेष बीमारी को दूर करने के मामले में भाग्यशाली होंगे. अगर हम ऐसा नहीं करते हैं, तो कल तक हम जिस यूके वेरिएंट, दक्षिण अफ्रीका का वेरिएंट और ब्राजील वेरिएंट के बारे में बात कर रहे थे, वो अचानक भारत का वेरिएंट बन सकता है.

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