दिल्ली में कोरोना का कहर, कोविड ICU बेड पर क्या बोले डॉक्टर्स

हालात बिगड़े हैं, जिसकी कई वजहें हैं और इसीलिए आईसीयू बेड उपलब्ध होना जरूरी है

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सेहतनामा
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कोरोना संकट: क्या हैं हालात?
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देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना पॉजिटिव मामले तेजी से बढ़े हैं और रोगियों की मौत का आंकड़ा भी पिछले कुछ हफ्तों से ज्यादा रह रहा है. कुछ लोगों का मानना है कि दिल्ली में कोरोना वायरस की 'तीसरी वेव' आ चुकी है.

हॉस्पिटल में भर्ती होने वालों की तादाद बढ़ी है और उस हिसाब से बेड की व्यवस्था न होना स्थिति को और चिंताजनक बना सकती है.

हालांकि दिल्ली सरकार दिल्ली के सभी प्राइवेट अस्पतालों के 80 फीसदी आईसीयू बेड कोरोना रोगियों के लिए आरक्षित रखने का फैसला ले चुकी है, जिसके बारे में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 19 नवंबर की प्रेस कॉन्फ्रेंस बताया था.

कोरोना संकट: क्या हैं हालात?

पूरे सिस्टम के लिए ये बाढ़ जैसी स्थिति है. डॉक्टर एक-दूसरे को फोन करके पूछ रहे हैं कि क्या दूसरे अस्पतालों में बेड उपलब्ध हैं. वास्तव में हालात खराब हैं.
डॉ सुमित रे, हेड, क्रिटिकल केयर मेडिसिन, होली फैमिली हॉस्पिटल, दिल्ली

एक्सपर्ट्स का मानना है कि प्रदूषण का स्तर, सर्दियों और त्योहारों के मौसम के साथ-साथ सावधानियों में चूक ने भी हालात को बदतर बना दिया है. जैसे 11 नवंबर को दिल्ली में रिकॉर्ड 8,593 नए मामले सामने आए.

19 नवंबर को आए हेल्थ बुलेटिन में सामने आया कि दिल्ली में उस दिन 24 घंटों में सबसे ज्यादा 131 मौतें हुईं.

आईसीयू बेड के लिए एडमिशन की बढ़ती मांगों को मैनेज करने में अस्पताल मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. फिट ने कई हॉस्पिटल के डॉक्टरों से बात की और सभी ने एक ही बात कही कि उनके अस्पताल लगभग भरे हुए हैं.

'कोविड ICU बेड खाली नहीं हैं'

इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर (ISIC) में इंटरनल एंड रेस्पिरेटरी मेडिसिन के डॉ विजय दत्ता कहते हैं,

ICU में एडमिशन पिछले महीने से बढ़ गया है. औसतन रोजाना 7-8 आईसीयू एडमिशन की मांग होती है. 19 नवंबर को ISIC में सिर्फ एक कोविड-19 आईसीयू बेड था, वो भी बिना वेंटिलेटर के था.

शालीमार बाग के फोर्टिस हॉस्पिटल में क्रिटिकल केयर यूनिट के हेड डॉ पंकज कुमार ने भी बताया कि 19 नवंबर को हॉस्पिटल के पास कोई बेड या वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं था.

साकेत के मैक्स हॉस्पिटल में भी हालात कोई बेहतर नहीं थे. क्रिटिकल केयर के सीनियर डायरेक्टर और इंटरनल मेडिसिन के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ अरुण दीवान ने कहा, "हमारे हॉस्पिटल में दूसरे राज्यों से रेफर किए गए रोगी भी आते हैं. इसलिए हम पिछले कई महीनों से फुल हैं. पिछले 6 महीने हम करीब 100% फुल रहे. जब दिल्ली इतनी बुरी तरह प्रभावित नहीं हुई थी, तब भी हम कुछ घंटों में मरीजों के लिए व्यवस्था कर लेते थे. लेकिन अब हमें इसके लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है."

उन्होंने बताया कि सिर्फ आईसीयू बेड्स ही नहीं बल्कि स्पेशिएलिटी बेड्स भी महत्वपूर्ण हैं, उन मरीजों की देखभाल के लिए जो पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे हैं.

उजाला साइगनस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के फाउंडर डायरेक्टर डॉ शुचिन बजाज कहते हैं,

"हां, हम आईसीयू एडमिशन में बढ़त देख रहे हैं, बहुत कम बेड उपलब्ध हैं. कल मैं अपने हॉस्पिटल में एक पेशेंट के लिए वेंटिलेटर की व्यवस्था करने के लिए जूझ रहा था. आईसीयू का उपयोग बहुत अधिक है क्योंकि दूसरी और तीसरी लहरें अधिक घातक और व्यापक हैं क्योंकि लोगों ने लॉकडाउन को पूरी तरह से खोल दिया है. पॉल्यूशन फेफड़ों पर ज्यादा लोड डाल रहा है. ये बीमारी में ज्यादा दिक्कतें कर रहा है."

वो कहते हैं कि सभी प्राइवेट अस्पतालों में आईसीयू बेड भरे हैं और अब वेंटिलेटर के साथ बेड मिलना बेहद मुश्किल काम है.

स्टाफ, संसाधन और दूसरी कमियां

पिछले हफ्ते फिट ने ये पता लगाने की कोशिश की थी कि दिल्ली कोरोना ऐप पर जो जानकारी दी जा रही है, वो कितनी सही है. सरकारी और प्राइवेट दोनों अस्पतालों के मामले में विसंगतियां सामने आईं.

राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल की ओर से बताया गया कि सिचुएशन हर मिनट के साथ बदल रही है. हो सकता है कि जब तक मरीज पहुंचे तब तक सारे बेड भर चुके हों.

समस्या कोरोना ऐप पर रियल टाइम डेटा की कमी में दिखती है. बहुत से अस्पतालों में जहां हमने कॉल किया वहां मिली जानकारी ऐप के डेटा से मैच नहीं कर रही थी.

द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक आईसीयू बेड के अलावा हॉस्पिटल संसाधन और स्टाफ की कमी से भी जूझ रहे हैं, जिसके कारण डॉक्टरों को लगातार 14-14 घंटे काम करना पड़ रहा है ताकि बढ़े हुए वर्कलोड को हैंडल किया जा सके.

यही वजह है कि डॉक्टरों को ‘एयरलिफ्ट’ कर दिल्ली लाने की जरूरत आन पड़ी है. केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के 45 डॉक्टर और 160 पैरामेडिक्स का एक ग्रुप कोराना के बढ़ते मामलों को देखते हुए दिल्ली सरकार को मदद पहुंचाने राष्ट्रीय राजधानी पहुंच चुका है. करीब 300 ऐसे स्वास्थ्यकर्मियों को दिल्ली लाने की तैयारी है. ये जानकारी गृह मंत्रालय की ओर से दी गई.

कोरोना रोगियों के लिए बेड रिजर्व करने का आदेश

दिल्ली सरकार ने 42 प्राइवेट हॉस्पिटलों में 80% ICU बेड को COVID-19 मरीजों की इलाज के लिए रिजर्व करने का आदेश दिया है.

इसके अलावा 90 प्राइवेट अस्पतालों को अपने टोटल बेड का 60% कोरोना रोगियों के ट्रीटमेंट के लिए रिजर्व करने का भी आदेश दिया है.

दिल्ली सरकार की ओर से सख्ती

दिल्ली में कोरोना वायरस के बढ़ते केसों को देखते हुए सरकार सख्त हो गई है. 21 नवंबर से से कोरोना गाइडलाइंस का उल्लंघन करने वालों पर दो हजार रुपये का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा.

दिल्ली सरकार के मुताबिक 5 नियमों के उल्लंघन पर यह जुर्माना लगाया जाएगा.

  1. मास्क न लगाने की स्थिति में

  2. क्वारंटीन नियमों का उल्लंघन

  3. सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन

  4. पब्लिक प्लेस पर थूकने की स्थिति में

  5. पब्लिक प्लेस पर गुटखा, तंबाकू या पान खाने की स्थिति में

बता दें अब सिर्फ दिल्ली में ही नहीं दूसरे राज्यों में मामलों में उछाल आया है, जिसके चलते कई राज्यों ने सख्ती शुरू कर दी है. कुछ राज्यों में नाइट कर्फ्यू लागू किया जा रहा है, तो कहीं स्कूलों को वापस खोलने का फैसला वापस लिया जा रहा है.

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