COVID-19|क्या डायबिटिक लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है कोरोनावायरस?
जानिए डायबिटीज के मरीज कैसे रखें अपना ख्याल.
जानिए डायबिटीज के मरीज कैसे रखें अपना ख्याल.(फोटो: फिट)

COVID-19|क्या डायबिटिक लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है कोरोनावायरस?

अब जबकि महामारी बन चुके कोरोनावायरस डिजीज-2019 (COVID-19) ने हमारी जिंदगी को अचानक से बदल दिया है. हम में से बहुत से लोग ऐसे हैं, जिनके लिए इस बीमारी से खतरा ज्यादा बड़ा और गंभीर हो सकता है. बुजुर्गों के अलावा हर उम्र के लोग वे लोग जिनकी मेडिकल कंडीशन पहले से खराब है, उनके लिए COVID-19 ज्यादा गंभीर हो सकता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार,

चीन के आंकड़ों से पता चला है कि जहां बिना किसी अन्य बीमारी वाले लोगों में COVID-19 से मृत्यु दर 1.4 प्रतिशत थी, वहीं डायबिटीज वाले मरीजों में यह 9 प्रतिशत से ज्यादा थी.
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द लांसेट में छपे एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि COVID-19 इन्टेंसिव केयर यूनिट (ICU) के 52 मरीजों के ग्रुप में से 32 लोगों की मौत हुई, जिनमें से 22 फीसदी पेशेंट डायबिटिक थे, जो डायबिटीज को ‘साथ के विनाशकारी रोगों’ में सबसे घातक बना देता है.

इन आंकड़ों के पीछे वजह क्या है और डायबिटीज के मरीजों को महफूज रहने के लिए क्या करना है? ये समझने के लिए फिट ने विशेषज्ञों से बात की.

डायबिटीज और संक्रमण

डायबिटीज एक क्रोनिक मेटाबॉलिक बीमारी है, जिसमें किसी व्यक्ति का हाई ब्लड ग्लूकोज (ब्लड शुगर) स्तर या तो अपर्याप्त इंसुलिन उत्पादन के कारण होता है या इंसुलिन के प्रति शरीर की कोशिकाओं के प्रतिक्रिया नहीं करने या दोनों कारणों से हो सकता है.

नेशनल डायबिटीज ओबेसिटी एंड कोलेस्ट्रॉल फाउंडेशन (N-DOC) के चेयमैन डॉ अनूप मिश्रा कहते हैं,

कई डायबिटीज के मरीज जो 60 साल से ऊपर के हैं, पहले से ही अपनी उम्र के कारण हाई रिस्क वाली श्रेणी में आते हैं. लेकिन जो भी उम्र हो एक बार COVID-19 की चपेट में आने पर, बिना स्वास्थ्य जटिलताओं वाले दूसरे मरीजों की तुलना में डायबिटीज के मरीजों में गंभीर जटिलताओं की दर ऊंची होती है. यह सब इस बात पर निर्भर करेगा कि वे अपने शुगर लेवल को कितनी अच्छी तरह नियंत्रित और उसकी निगरानी करते हैं.

एक अध्ययन में, जिसमें डॉ मिश्रा की भी भागीदारी थी, यह पाया गया कि डायबिटीज वाले व्यक्ति सहज रूप से इन्फ्लूएंजा और निमोनिया जैसे संक्रमणों के हाई रिस्क में होते हैं.

पिछली महामारियों के दौरान, खासकर सांस से फैलने वाले वायरस से होने वाली बीमारियों में ऐसी ही प्रवृत्ति देखी जा चुकी है.

उदाहरण के लिए, H1N1, सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS) और मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (MERS) से संक्रमित मरीजों की मौत के लिए डायबिटीज को एक महत्वपूर्ण रिस्क फैक्टर पाया गया था.

हालांकि डायबिटीज के मरीजों में COVID-19 के असर के आंकड़े अभी ज्यादा उपलब्ध नहीं हैं, चीन के पिछले अनुभव और संख्या से पता चलता है कि डायबिटीज के मरीजों को वास्तव में मौजूदा महामारी में हाई रिस्क हो सकता है.

लिंक क्या बताता है?

WebMD के अनुसार, डायबिटीज संक्रमण से लड़ने की आपके शरीर की क्षमता को कम कर सकता है. आपके ब्लड और टिश्यूज में हाई शुगर लेवल बैक्टीरिया को बढ़ने देता है और संक्रमण को अधिक तेजी से विकसित होने में मदद करता है. डॉ अनूप बताते हैं कि डायबिटीज वाले लोगों में शुगर असंतुलन इम्यून सिस्टम को कमजोर कर सकता है.

डायबिटीज इम्यून सिस्टम में समस्या पैदा कर सकता है, जिससे वायरस या बैक्टीरिया पर हमला करने वाले सेल्स, शुगर कंटेंट में बढ़ोतरी होने से बेकार हो जाते हैं. यह बीमारी से स्वस्थ होने की शक्ति को कम करता है और लोगों को संक्रमण का आसान शिकार बना देता है, यहां तक कि डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों में भी.
डॉ अनूप मिश्रा

शरीर की प्रणाली पर ज्यादा दबाव पैदा होने से, वायरस अन्य अंगों को संक्रमित और प्रभावित कर सकता है, जिससे दूसरी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.

दुनिया में भारत को डायबिटीज की राजधानी माना जाता है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल के अनुसार, भारत की 1.3 अरब की आबादी में से 6 करोड़ से ज्यादा लोग डायबिटीज के मरीज हैं. साल 2035 तक यह संख्या बढ़कर 1.5 अरब की अनुमानित आबादी में से 10.9 करोड़ तक पहुंच जाने की संभावना है.

असल में, भारत में COVID-19 से जितनी भी मौतें हुई हैं, सभी मामलों में दूसरी बीमारियां भी थीं- हाइपरटेंशन और डायबिटीज से लेकर किडनी की बीमारी और अस्थमा तक.

देश में लगातार बढ़ रहे नोवल कोरोनोवायरस मरीजों के साथ, खासकर डायबिटीज से पीड़ित लोगों में बीमारी के खतरे को लेकर जागरुकता जरूरी है. वे इस जोखिम को कम करने के लिए क्या कर सकते हैं?

“नियंत्रित डायबिटीज से बेहतर कुछ नहीं है”

फिट ने जब डायबिटीज इंडिया यूथ एक्शन (DIYA) के सह-संस्थापक हर्ष कोहली, जो खुद भी टाइप 1 डायबिटीज के मरीज हैं, से पूछा कि महामारी के दौरान वो अपनी देखभाल कैसे कर रहे है, तो उनका कहना था-

हम में से अधिकांश लोग सेल्फ-आइसोलेशन में चले गए हैं. हमें इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा है और हम यह बात जानते हैं. कोई भी चीज हमारे ब्लड शुगर के स्तर में कहर बरपा कर सकती है और अगर ऐसा होता है, तो हम हाई रिस्क में हैं. डायबिटीज के मरीज के लिए सबसे पहली बात सेल्फ-आइसोलेशन है.
हर्ष कोहली

आम सुरक्षा सावधानियों जैसे कि हैंड और रेस्पिरेटरी हाइजीन का ख्याल रखने और सोशल डिस्टेन्सिंग (जो कि हर किसी के लिए जरूरी है) डायबिटीज वाले लोगों के लिए सबसे जरूरी है. इसके अलावा, डॉ अनूप मिश्रा किसी भी उतार-चढ़ाव पर नजर रखने के लिए डायबिटीज के मरीजों को सामान्य से ज्यादा बार ब्लड शुगर की जांच करने की सलाह देते हैं. अगर शुगर नियंत्रित नहीं है, तो मरीज को तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. इन्फ्लूएंजा और निमोनिया का वैक्सीनेशन, एक्सरसाइज के लिए समय निकालना और हेल्दी डाइट लेना भी जरूरी है.

अगर वे संक्रमित हो जाते हैं, तो उनकी शुगर और ज्यादा बढ़ सकती है, तो इसका मतलब है कि उसे काबू में लाने के लिए फौरन इंसुलिन या ड्रग्स दिए जाने की जरूरत है. उनके ब्लड प्रेशर पर भी खास निगरानी रखनी चाहिए और देखभाल की जानी है.
डॉ अनूप मिश्रा

साइंसडायरेक्ट में प्रकाशित अध्ययन में कहा गया है, “गंभीर बीमारी (COVID-19) वाले मरीजों को लगातार ब्लड शुगर की निगरानी की जरूरत होती है. ओरल एजेंट्स खासतौर से मेटफॉर्मिन और सोडियम ग्लूकोज कोट्रांसपोर्टर-2 इनहिबिटर को रोक देने की जरूरत है. अस्पताल में भर्ती बीमार मरीजों में हाइपरग्लाइसेमिया के नियंत्रण के लिए इंसुलिन सबसे आम दवा है.”

उनका कहना है कि जब तक कि जरूरी न हो नियमित चेक-अप और सवालों के लिए लोग अपने डॉक्टरों से फोन पर बात कर सकते हैं या ई-कंसल्टेशन का विकल्प चुन सकते हैं. बल्कि उन्होंने भी कोरोनोवायरस महामारी के दौरान डायबिटीज को लेकर सवालों का जवाब देने के लिए मरीजों के लिए एक हेल्पलाइन (08826570322) शुरू की है.

तैयारी: क्या इंसुलिन का स्टॉक कर लें?

लेकिन एक और सवाल उठता है कि क्या डायबिटीज से पीड़ित लोगों को इंसुलिन का स्टॉक जमा कर लेना चाहिए?

लॉकडाउन और कर्फ्यू के दौर में, डॉ अनूप कम से कम एक महीने के लिए इंसुलिन का स्टॉक रखने की सलाह देते हैं, हालांकि मेडिकल स्टोर्स के खुले रहने की उम्मीद है और चिंता का कोई कारण नहीं होना चाहिए.

हर्ष कोहली कहते हैं, “हम जानते हैं कि देश में पर्याप्त स्टॉक है. लेकिन हमें कुछ अतिरिक्त आपूर्ति रखनी चाहिए. अगर मैं आमतौर पर एक महीने के लिए इंसुलिन स्टॉक रखता हूं, तो मुझे इसे 45 दिन तक चलाने के लिए बढ़ा लेना चाहिए, और यही बात पेन, सिरिंज व किट जैसी दूसरी जरूरतों पर भी लागू होती है.”

वह एक और बात पर ध्यान दिलाते हैं कि हममें से हर एक को अपने आसपास रहने वाले अपेक्षाकृत ज्यादा जोखिम वाले लोगों (जैसे कि डायबिटीज या गंभीर बीमारी वाले) के बारे में पता होना चाहिए. उन्हें आपात स्थिति में मदद की जरूरत पड़ सकती है. वह कहते हैं यह एकजुटता का समय है और जरूरतमंद लोगों की मदद करने की जरूरत है.

अंत में, डायबिटीज रोगियों के लिए आसान नियम है. “अगर आपके ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रण में है, तो आप किसी भी आम कामकाजी शख्स जैसे ही हैं. लेकिन जोखिम को पहचानें और सावधानी बरतें. हर्ष कहते हैं, खुद को सेल्फ-आइसोलेशन में रखें, जैसा कि हम सब कर रहे हैं.

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