वैज्ञानिकों ने कहा- सरकार को दी गई थी नए कोरोना वेरिएंट की जानकारी

कोरोना मामलों में बढ़ोतरी का भी संकेत दिया गया था

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<div class="paragraphs"><p>वैज्ञानिकों ने कहा है कि उन्होंने सरकार को कोरोना वायरस के नए और अधिक संक्रामक वेरिएंट के बारे में सचेत किया था.</p></div>
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वैज्ञानिक समुदाय ने कहा है कि उन्होंने केंद्र सरकार को कोविड वायरस के नए वेरिएंट और इस साल मई में कोरोना मामलों में बढ़ोतरी के बारे में पहले से संकेत दे दिया था. हालांकि, समुदाय ने डेटा विश्लेषण की कमी के कारण आगे के लिए कोई भविष्यवाणी करने से परहेज किया.

आईआईटी, हैदराबाद में प्रोफेसर डॉ. एम विद्यासागर ने कहा कि इस साल 13 मार्च से कोविड के मामले ऊपर की ओर दिखाई दे रहे थे, लेकिन उनके पास अपेक्षित डेटा उपलब्ध नहीं था, इसलिए उन्होंने कोई भविष्यवाणी नहीं की .

विद्यासागर ने आगे कहा कि उनके संकेत देने के बाद, सरकार ने कहा था कि अधिकारियों ने अल्पकालिक योजनाओं, लंबी और मध्यम अवधि की योजनाएं बनाई हैं. विद्यासागर ने देश भर में ऑक्सीजन की आपूर्ति के मौजूदा संकट का हवाला देते हुआ कहा कि पिछले कुछ हफ्तों की घटनाओं के आधार पर, हालांकि, यह योजनाएं अपर्याप्त लगती हैं.

कोरोना के नए मामलों पर IIT कानपुर की स्टडी

अप्रैल में आईआईटी कानपुर के अध्ययन में भी कहा गया कि दूसरी लहर में दैनिक मामले 8 मई तक बढ़ेंगे.

इस अध्ययन ने 14 मई से 18 मई के बीच 38 से 44 लाख सक्रिय मामलों की भी भविष्यवाणी की है.

वैज्ञानिकों ने कहा कि उन्होंने सरकार को कोरोना वायरस के नए और अधिक संक्रामक वेरिएंट के बारे में सचेत किया था.

SARS-CoV-2 जेनेटिक्स कंसोर्टियम (INSACOG) की स्थापना सरकार ने विशेष रूप से कोरोना वायरस के जीनोमिक वेरिएंट का पता लगाने के लिए पिछले साल दिसंबर में की थी. संस्था ने वायरस वेरिएंट का अध्ययन करने वाले देश भर में 10 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की जांच भी की थी.

संस्था ने पहली बार फरवरी की शुरुआत में B.1.617 का पता लगाया. राज्य में संचालित इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज के डायरेक्टर और INSACOG के सदस्य अजय परीदा ने कथित तौर पर पहली बार फरवरी में B.1.617 का पता लगाया और सरकार को सतर्क किया था.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र को ये खोज मार्च में मिली.

इसमें कहा गया था कि E484Q और L452R म्यूटेशन चिंता का विषय हैं. ये बताया गया कि E484Q म्यूटेंट वायरस कल्चर में हाई न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी से बच जा रहा है और L452R म्यूटेशन ट्रांसमिशन बढ़ने और इम्यून सिस्टम से बचने के लिए जिम्मेदार था.

निष्कर्षों के अनुसार वायरस के म्यूटेंट वर्जन अधिक आसानी से एक मानव कोशिका में प्रवेश कर सकते हैं और एक व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया का मुकाबला कर सकते हैं.

वेरिएंट्स के मद्देनजर हमें पहले से बताए गए कोविड प्रोटोकॉल का और सख्ती से पालन करने की जरूरत है.

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