ADVERTISEMENT

कोरोना वैक्सीन और ब्लड क्लॉटिंग का क्या मामला है? समझिए

Corona Vaccine: कहां देखे गए हैं ब्लड क्लॉटिंग के कुछ अजीब मामले

Updated

अमेरिका में जॉनसन एंड जॉनसन की कोरोना वैक्सीन और यूरोप में एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन से साथ ब्लड क्लॉटिंग के कुछ दुर्लभ मामलों की हालिया रिपोर्ट ने इन वैक्सीन की सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

भारत में, COVID-19 के खिलाफ हमारा टीकाकरण अभियान बहुत हद तक एस्ट्राजेनेका की ही वैक्सीन कोविशिल्ड पर निर्भर करता है, जिसे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में तैयार किया जा रहा है.

अमेरिकी दवा रेगुलेटरों द्वारा जॉनसन एंड जॉनसन की कोरोना वैक्सीन पर रोक, एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन के साथ यूरोप के कुछ देशों में सामने आए ब्लड क्लॉटिंग के मामले भारत के लिए क्या चिंता का विषय हैं?

फिट ने पूरे मामले को समझने के लिए पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के चेयरपर्सन प्रो. के. श्रीनाथ रेड्डी और अशोका यूनिवर्सिटी के सीनियर एडवाइजर डॉ. ललित कांत से बात की है.

ADVERTISEMENT

अमेरिका ने क्यों रोका जॉनसन एंड जॉनसन की सिंगल डोज वैक्सीन का इस्तेमाल?

अमेरिका ने 13 अप्रैल को जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन का इस्तेमाल फिलहाल रोकने का ऐलान किया. तब तक 68 लाख से ज्यादा अमेरिकियों को इसकी डोज दी जा चुकी थी. ये रोक वैक्सीन लगवाले वाले 6 लोगों में खून के थक्के जमने की शिकायत मिलने के बाद लगाई गई, इन 6 लोगों में से एक की मौत भी हो गई.

पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया (PHFI) के चेयरपर्सन डॉ के. श्रीनाथ रेड्डी ने फिट से बातचीत में बताया कि ब्लड क्लॉटिंग के दुर्लभ मामले 50 से कम उम्र की महिलाओं में पाए गए और ये असामान्य क्लॉटिंग थी.

डॉ. रेड्डी बताते हैं कि अमेरिका में जॉनसन एंड जॉनसन की कोविड वैक्सीन पर अस्थाई रोक लगाई गई है, ताकि मामले की पूरी जांच हो सके और किसी को भी खतरा न हो.

डॉ. ललित कांत कहते हैं कि इस तरह की रोक एहतियातन लगाई गई है और एक बार समीक्षा पूरी हो जाने के बाद FDA इसके इस्तेमाल को लेकर घोषणा करेगा. डॉ कांत कहते हैं कि जब भी सुरक्षा की बात आती है, वैक्सीन के साथ ऐसा होता है.

अगर ऐसे मामले दुर्लभ निकले, तो इसे फिर शुरू कर सकते हैं या अगर लगता है कि सिर्फ युवा महिलाओं में ही इस तरह की जटिलताएं सीमित हैं, तो शायद उन्हें J&J की वैक्सीन नहीं देंगे.
डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी, चेयरपर्सन, PHFI

डॉ रेड्डी कहते हैं कि अमेरिका के पास कोरोना के खिलाफ फाइजर और मॉडर्ना का विकल्प है और इसलिए फिलहाल जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन पर रोक लगाकर जांच-पड़ताल करने में कोई बुराई नहीं है.

ADVERTISEMENT

एडवर्स इवेंट के 6 मामलों में देखी गई ब्लड क्लॉटिंग को असामान्य क्यों कहा जा रहा है?

ये मामले खून के सामान्य थक्के वाले नहीं थे, इनमें दो असामान्य बातें गौर की गई.

  1. ब्लड क्लॉटिंग वहां पाई गई, जहां आमतौर पर क्लॉटिंग नहीं होती.
  2. प्लेटलेट्स की संख्या कम हुई थी, लेकिन फिर भी क्लॉटिंग हुई. दरअसल प्लेटलेट्स थक्के बनाने में मदद करते हैं.
ये इस तरह से अजब है कि जहां प्लेटलेट्स कम होने के नाते ब्लीडिंग की स्थिति बन सकती है, जैसा कि डेंगू में होता है, लेकिन यहां ब्लड क्लॉटिंग देखी गई.
डॉ के. श्रीनाथ रेड्डी, चेयरपर्सन, PHFI

डॉ रेड्डी बताते हैं कि इन लोगों के शरीर में प्लेटलेट्स के खिलाफ एंटीबॉडी बने थे, जो प्लेटलेट्स पर हमला कर रहे थे और इस वजह से प्लेटलेट्स की संख्या कम हुई. लेकिन खून को गाढ़ा करने वाले दूसरे प्रोटीन एक्टिवेट हुए और क्लॉटिंग हो गई.

ब्लड क्लॉटिंग का एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन कुछ दुर्लभ मामलों में एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन से भी जुड़ा पाया गया था. इसी वजह से कई यूरोपीय देशों ने एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल पर रोक लगाई थी.

ADVERTISEMENT

भारत में तैयार कोविशील्ड एस्ट्राजेनेका की ही वैक्सीन है, क्या भारत में ब्लड क्लॉटिंग के मामले आए हैं?

भारत में अब तक ऐसे मामलों की कोई सूचना नहीं है.

अगर वैक्सीन लगवाने के बाद इस तरह के मामले आ रहे होते, तो सरकार या फिर डॉक्टरों की ओर से खबर मिल ही जाती है. लेकिन फिर भी निगरानी रखने की जरूरत है.
डॉ के. श्रीनाथ रेड्डी, चेयरपर्सन, PHFI

एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लगवाने के बाद यूरोप में ब्लड क्लॉटिंग के कुछ मामले आए हैं, लेकिन भारत में इस्तेमाल एस्ट्राजेनेका की ही कोविशील्ड के मामले में इस तरह की कोई घटना अब तक नहीं पता चली है.

डॉ. रेड्डी कहते हैं कि अमेरिका और यूरोप में ब्लड क्लॉटिंग का जो एडवर्स इवेंट देखा गया, वो एक ऑटोइम्यून रिएक्शन है, इसकी क्या वजह है, हमें अभी पता नहीं है.

ADVERTISEMENT

J&J और एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन दोनों ही एडिनोवायरस पर आधारित वैक्सीन हैं. क्या ब्लड क्लॉटिंग की दुर्लभ घटनाएं एडिनोवायरस से जुड़ी हैं? स्पुतनिक V, जिसे अब भारत में इस्तेमाल के लिए ग्रीन सिग्नल दे दिया गया है, ये भी एडिनोवायरस पर आधारित वैक्सीन है. क्या स्पुतनिक V के मामले में क्लॉटिंग की कोई आशंका है?

एस्ट्राजेनेका, जॉनसन एंड जॉनसन, स्पुतनिक V इन तीनों कोरोना वैक्सीन में एडिनोवायरस का इस्तेमाल किया गया है.

एडिनोवायरस वैक्सीन में एक वायरस को स्पाइक प्रोटीन का DNA शरीर में पहुंचाने की जिम्मेदारी दी जाती है.

एस्ट्राजेनेका, जॉनसन एंड जॉनसन, स्पुतनिक V इन तीनों कोरोना वैक्सीन में अलग-अलग एडिनोवायरस का इस्तेमाल किया गया है.

  • एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन में चिम्पांजी वायरस इस्तेमाल किया है.

  • जॉनसन एंड जॉनसन में एक ह्यूमन एडिनोवायरस इस्तेमाल किया है.

  • स्पुतनिक V में दो शॉट्स के लिए दो अलग-अलग ह्यूमन एडिनोवायरस का इस्तेमाल किया गया है.

डॉ. रेड्डी कहते हैं कि ब्लड क्लॉटिंग की दुर्लभ घटनाएं एडिनोवायरस से जुड़ी हैं या नहीं, ये कहना मुश्किल है.

डॉ. रेड्डी कहते हैं, "रूस की स्पुतनिक V के निर्माताओं का कहना है कि इन दुर्लभ एडवर्स इवेंट का ताल्लुक एडिनोवायरस से नहीं है. ये DNA को सही से नहीं बांधने से जुड़ा है. DNA जल्दी से निकल जाता है, इस वजह से ऐसा रिएक्शन होता है. उनके मुताबिक स्पुतनिक V के मामले में फ्री फ्लोटिंग DNA नहीं बनता. ये किस हद तक सही है, कहना मुश्किल है."

जिन-जिन देशों रूस की स्पुतनिक V वैक्सीन दी जा रही है, वहां निगरानी रखी जानी चाहिए, फिलहाल रूसी वैक्सीन के बारे में ऐसी कोई खबर नहीं आई है.

ADVERTISEMENT

विदेशों में मंजूर वैक्सीन को मंजूरी, भारत का ये फैसला कितना महत्वपूर्ण है?

डॉ. रेड्डी कहते हैं कि विदेशों में जिन वैक्सीन का इमरजेंसी इस्तेमाल हो रहा है, उन्हें भारत में फास्ट ट्रैक मंजूरी देने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए और देश में इनके इस्तेमाल के साथ निगरानी जारी रखी जा सकती है.

विदेश में मंजूर किसी वैक्सीन का पहले भारत में ट्रायल करना और उसके मंजूरी देना आसान नहीं है क्योंकि लोगों के पास दूसरी वैक्सीन का विकल्प है, तो ट्रायल में क्यों भाग लेंगे. इस तरह से महीनों तक उन्हें पता ही नहीं चलेगा कि उन्हें वैक्सीन दी गई है या प्लेसिबो.

हालांकि देश में दूसरी वैक्सीन कब से आएंगी, कितनी मात्रा में आएंगी, किस हद तक बनाई जाएंगी, अब ये देखना होगा.

(Subscribe to FIT on Telegram)

ADVERTISEMENT
Published: 
ADVERTISEMENT
Stay Up On Your Health

Subscribe To Our Daily Newsletter Now.

Join over 120,000 subscribers!
ADVERTISEMENT