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COVID-19: कोरोना संक्रमण के बाद भी कुछ लोग बीमार क्यों नहीं पड़ते?

COVID-19 Asymptomatic Cases: कोरोना पॉजिटिव होने पर भी क्यों नहीं दिखते लक्षण

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<div class="paragraphs"><p>Asymptomatic Coronavirus Infection:&nbsp;आखिर COVID-19 के वायरस से संक्रमित होने के बाद भी कुछ लोग बीमार क्यों नहीं पड़ते?</p></div>
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COVID-19 बीमारी करने वाले SARS-CoV-2 नाम के कोरोना वायरस से संक्रमित होने पर अगर कोई बीमार पड़ता है, तो उसे माइल्ड, मॉडरेट और सीवियर कैटेगरी में कोरोना वायरस डिजीज (COVID) हो सकती है, वहीं ऐसा भी हो सकता है कि कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद भी कुछ लोग बीमार न पड़े, कोरोना के कई मामलों में संक्रमण के बाद भी लोगों में लक्षण नहीं नजर आते. ऐसे लोगों को Asymptomatic कहा जाता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन Asymptomatic Case को लैब से कन्फर्म लेकिन बिना कोई लक्षण प्रकट करने वाले संक्रमित व्यक्ति के तौर पर परिभाषित करता है.

आखिर COVID-19 के वायरस से संक्रमित होने के बाद भी कुछ लोग बीमार क्यों नहीं पड़ते? संक्रमण के बावजूद एसिम्प्टोमैटिक रहने की क्या वजह होती है?

कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद भी बीमार न पड़ने की वजह

यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद में इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी एंड स्लीप मेडिसिन कंसल्टेंट डॉ. विश्वेश्वरन बालासुब्रमण्यम बताते हैं, "अध्ययनों से पता चला है कि वायरल संक्रमण की गंभीरता ACE2 की मैच्युरिटी और वायरस के साथ उसकी बंधने की क्षमता (binding capacity) से संबंधित हो सकती है."

इसलिए ऐसा माना गया कि हो सकता है बिना लक्षण वाले कोरोना संक्रमितों में ACE2 का लोअर लेवल और SARS-CoV-2 के साथ बंधने की कमजोर क्षमता एक फैक्टर हो.
डॉ. विश्वेश्वरन बालासुब्रमण्यम, कंसल्टेंट इंटरवेंशनल पल्मोनॉलॉजी एंड स्लीप मेडिसिन, यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद

एसिम्पटोमैटिक लोगों में SARS-CoV-2 के खिलाफ सिर्फ एक खास हल्की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया (mild immune response) रिपोर्ट की गई है, जो इन रोगियों में किसी भी क्लीनिकल या रेडियोलॉजिकल लक्षणों के न दिखने की व्याख्या करती है.

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मुंबई के जसलोक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में क्रिटिकल केयर कंसल्टेंट डॉ. पिनाक पंड्या बताते हैं कि SARS-CoV-2 वायरस का या शरीर में कोई भी इन्फेक्शन होने पर शरीर सबसे पहले उसके खिलाफ इम्यून रिस्पॉन्स जताता है.

अगर वायरल एक्सपोजर और वायरल लोड कम है, तो B कोशिकाएं और T कोशिकाएं जल्द ही उसे काबू में कर सकती हैं. शरीर में संक्रमण के खिलाफ एंटीबॉडी बन सकती है और उसके बाद इन्फेक्शन ठीक हो जाता है और संक्रमित शख्स रिकवरी पीरियड में चला जाता हैं.
डॉ. पिनाक पंड्या

डॉ. पंड्या कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह देते हुए बताते हैं, "कोरोना के संदर्भ में एक्सपोजर का मतलब है कि किसी व्यक्ति से 2 मीटर के अंदर आपने 15 मिनट से ज्यादा बिना मास्क के कॉन्टैक्ट रखा, तो ये सिग्निफिकेंट एक्सपोजर कहा जाएगा."

वो बताते हैं कि अगर आपका एक्सपोजर 15 मिनट से कम या 6 फीट के दूर से है, तो वायरस शरीर में इतना मिनिमल हो सकता है कि वायरस डिटेक्ट होने के बावजूद भी बॉडी काफी अच्छा और संतुलित इम्यून रिस्पॉन्स देती है कि आपको बीमारी न हो और कुछ लोगों को कोविड होने के बावजूद ज्यादा लक्षण न आएं.

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कोरोना संक्रमित कुछ लोगों में खास तरह के जीन से मिलती है सुरक्षा?

ब्रिटेन की न्यूकैसल यूनिवर्सिटी (Newcastle University) के शोधकर्ताओं का कहना है कि इसकी वजह HLA-DRB1*04:01 नाम का जीन हो सकता है. उनकी स्टडी “The influence of HLA genotype on the severity of COVID-19 infection” में इस पर गौर किया गया.

HLA journal में छपी इस स्टडी के मुताबिक HLA-DRB1*04:01 gene बिना कोरोना लक्षण वाले संक्रमित लोगों में COVID-19 से एक लेवल तक सुरक्षा देने के लिए जिम्मेदार हो सकता है.

इसमें एसिम्प्टोमैटिक लोगों की सीवियर कोविड रोगियों से तुलना और जांच की गई, जिन्हें पहले से कोई बीमारी नहीं थी.

यूनिवर्सिटी की मेडिकल टीम ने एसिम्प्टोमैटिक लोगों में ये जीन तीन गुना अधिक पाया.

रिसर्च में शामिल वैज्ञानिक डॉ. कारलोस इक्हेवेरिया कहते हैं, "रिसर्च के नतीजे बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये बताते हैं कि क्यों कुछ लोग संक्रमित होने के बाद भी बीमार नहीं होते. रिसर्च से साफ है कि लोगों का जीन टेस्ट भी कराया जा सकता है और यह जाना जा सकता है कि किसे भविष्य में वैक्सीन की अधिक जरूरत है."

हालांकि इस स्टडी में दूसरी आबादी के साथ और अधिक स्टडी किए जाने की जरूरत बताई गई है क्योंकि अन्य आबादी में प्रतिरोध प्रदान करने वाले एचएलए जीन की अलग-अलग प्रतियां हो सकती हैं.

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कोरोना के बिना लक्षण वालों से वायरस ट्रांसमिशन का कितना रिस्क?

डॉ. पंड्या और डॉ. सुब्रमण्यम कहते हैं कि वायरस का ट्रांसमिशन सिम्प्टोमैटिक या एसिम्प्टोमैटिक दोनों से हो सकता है.

ऐसी भी स्टडीज हैं, जिनमें एसिम्प्टोमैटिक मामलों में डिटेक्ट किया गया वायरल लोड सिम्प्टोमैटिक मरीजों जितना ही था, जो ये संकेत करती हैं कि बगैर लक्षण वालों से भी ट्रांसमिशन संभव है.
डॉ. विश्वेश्वरन बालासुब्रमण्यम, कंसल्टेंट इंटरवेंशनल पल्मोनॉलॉजी एंड स्लीप मेडिसिन, यशोदा हॉस्पिटल्स, हैदराबाद

कई स्टडीज में एसिम्प्टोमैटिक इन्फेक्शन की घटनाओं को निर्धारित करने पर ध्यान दिया. क्रूज जहाज डायमंड प्रिंसेस पर, 3711 यात्रियों के साथ, 634 कोरोना मामले एक बिना लक्षण वाले संक्रमित यात्री के हांगकांग में सवार होने के बाद हुए.

डायमंड प्रिंसेस की तरह, अर्जेंटीना के एक क्रूज जहाज की एक स्टडी में पाया गया कि 217 यात्रियों में से 59% यात्री COVID-19 पॉजिटिव टेस्ट किए गए; संक्रमित लोगों में से 81% एसिम्प्टोमैटिक थे.

स्पेन से पहला राष्ट्रव्यापी जनसंख्या-आधारित अध्ययन, जिसमें 35,883 घरों के 61,000 प्रतिभागी शामिल थे, इस स्टडी के नतीजे में 3 में से 1 इन्फेक्शन एसिम्प्टोमैटिक होने की बात कही गई और महामारी की दूसरी लहर से बचने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों को बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया.

हालांकि Asymptomatic संक्रमणों की सीमा को सटीक रूप से निर्धारित करना मुश्किल है क्योंकि इसके लिए लक्षण आए बगैर भी RT-PCR टेस्ट कराना जरूरी है और रिजल्ट पॉजिटिव आने के बाद ये भी ध्यान दिए जाने की जरूरत है कि कितने मामलों में बाद में लक्षण प्रकट हुए क्योंकि टेस्ट कराने वालों में Pre-symptomatic मामले भी हो सकते हैं.

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Asymptomatic और Pre-symptomatic में अंतर

दोनों शब्द उन लोगों के संदर्भ में हैं, जिनमें लक्षण नहीं होते हैं.

अंतर यह है कि 'एसिम्प्टोमैटिक' उन लोगों को संदर्भित करता है, जो संक्रमित हैं लेकिन कभी कोई लक्षण विकसित नहीं करते हैं, जबकि 'प्री-सिम्प्टोमैटिक' उन संक्रमित लोगों को संदर्भित करता है, जिनमें अभी तक लक्षण विकसित नहीं हुए हैं, लेकिन बाद में लक्षण सामने आते हैं.

डॉ. विश्वेश्वरन बालासुब्रमण्यम कहते हैं कि बिना लक्षण वाले लोगों में आगे चलकर लक्षण नजर भी आ सकते हैं, जिसकी गंभीरता अलग-अलग हो सकती है. इसलिए एसिम्टोमैटिक लोगों का भी सावधानी के साथ फॉलोअप आवश्यक है.

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