सर्दियों में कैसी हो आपकी डाइट? जानिए आयुर्वेद के बताए नियम

आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों के लिए रहन-सहन और आहार संबंधी नियम.

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फिट हिंदी
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सर्दियों में कैसी हो आपकी रूटीन और डाइट? जानिए आयुर्वेद के बताए नियम
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सर्दियां शुरू हो चुकी हैं, कड़ाके की ठंड पड़ रही है. आपने स्वेटर और दूसरे गर्म कपड़े निकाल लिए होंगे. गर्म पानी से नहाने भी लगे होंगे. मौसम के हिसाब से हमें कई बदलाव करने होते हैं. हमारी जीवनशैली और खानपान मौसम के अनुसार ही होनी चाहिए, इसलिए आयुर्वेद में 'ऋतुचर्या' के बारे में बताया गया है.

'ऋतु' का मतलब है 'मौसम' और 'चर्या' यानी 'रहन-सहन और आहार संबंधी नियम'. आयुर्वेद में 6 ऋतुओं के लिए अलग-अलग चर्या बताई गई है. इनका पालन कर हम खुद को कई बीमारियों से बचा सकते हैं.

आयुर्वेद का एक अहम पक्ष बीमारियों का उपचार करने की बजाए खानपान और जीवनशैली के जरिए स्वस्थ बने रहने यानी बीमार ना पड़ने पर आधारित है. इस उद्देश्य से दिनचर्या और ऋतुचर्या महत्वपूर्ण हो जाती है.

जीवा आयुर्वेद के डायरेक्टर डॉ प्रताप चौहान बताते हैं कि फिट रहने के लिए हमें हर मौसम के गुण और त्रिदोष यानी वात, पित्त और कफ पर उनके असर के बारे में जानना जरूरी है.

उदाहरण के लिए, वात तब बढ़ जाता है जब वातावरण सूखा, हवाओं वाला और ठंडा होता है जैसे सर्दियों में. सर्दियों में जब गीलापन और ठंड होती है तो कफ इकट्ठा हो जाता है. जब गर्मी और नमी होती है, तब पित्त बढ़ता है.

मौसम के अनुसार हो आहार और जीवनशैली

बढ़े हुए दोष को आहार और ऐसी जीवनशैली जो उस दोष के विपरीत हो, उसे अपनाकर कम किया जाता है.
बढ़े हुए दोष को आहार और ऐसी जीवनशैली जो उस दोष के विपरीत हो, उसे अपनाकर कम किया जाता है.
(फोटो: iStock)

एक्सपर्ट्स के मुताबिक गर्मी में जब पित्त बढ़ा हुआ होता है, तो ठंडक पहुंचाने वाले भोजन और पेय फायदेमंद रहते हैं और जब ठंड होती है और वात या कफ बढ़े हुए होते हैं, तो गर्मी देने वाला भोजन बेहतर होता है.

वैद्य और ईस्टर्न साइंटिस्ट जर्नल के चीफ एडिटर डॉ आर अचल बताते हैं कि मौसम के अनुरूप भोजन जरूरी होता है. जिस मौसम में जो सब्जियां, अनाज और फल होते हैं, उसी मौसम में उनका सेवन सेहत के लिए अच्छा होता है.

पहले खानपान में ऋतुचर्या का पालन आसान था क्योंकि सिर्फ मौसमी चीजें ही उपलब्ध होती थीं, लेकिन अब हर मौसम में हर चीज मिल रही है. इसलिए भोजन में असंतुलन हो रहा है.
डॉ आर अचल

डॉ चौहान के मुताबिक बढ़े हुए दोष को आहार और ऐसी जीवनशैली जो उस दोष के विपरीत हो, उसे अपनाकर कम किया जाता है.

ठंड के मौसम में क्या खाएं और क्या नहीं?

डॉ चौहान बताते हैं कि सर्दियों में पाचन की शक्ति यानी जठराग्नी काफी मजबूत होती है. ये अग्नि तेल, वसा, दूध से बनी चीजें जैसे घी, पनीर, खोवा आसानी से पचा लेती है.

डॉ आर अचल ठंड में खाने और ना खाने योग्य चीजों की लिस्ट के बारे में बताते हैं:

खाने में क्या शामिल करें?

ऐसी चीजें खाएं-पीएं जो शरीर को गर्मी दे.
ऐसी चीजें खाएं-पीएं जो शरीर को गर्मी दे.
(कार्ड: कामरान अख्तर)

सर्दियों में कफ का संचय रोकने के लिए अदरक, काली मिर्च, तुलसी का पत्ता, शहद, च्यवनप्राश लेना चाहिए. इसके साथ ही ऐसा ना हो कि ठंड में आप पानी पीना कम कर दें, रोजाना कम से कम 8 से 10 ग्लास गुनगुना पानी जरूर पीएं.

ठंड में किन चीजों से परहेज है जरूरी?

डॉ अचल बताते हैं कि ठंड में सूखा हुआ मांस और छोटी मछलियां, दही और ठंडी चीजें नहीं लेनी चाहिए. तीखी, कड़वी, कसैली और हल्की चीजें खाने से बचना चाहिए.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक सर्दियों में वात रोग बढ़ते हैं, इसलिए वातनाशक चीजें खाने की सलाह दी जाती है.

सर्दियों में कैसी हो आपकी लाइफस्टाइल?

तेल से शरीर की मालिश करनी चाहिए.
तेल से शरीर की मालिश करनी चाहिए.
(फोटो: iStock)
  • सर्दियों में स्किन रूखी होती है. इससे निपटने के लिए तेल से शरीर की मालिश करनी चाहिए. आप नारियल, जैतून, तिल किसी भी तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं.

  • नहाने के लिए गुनगुने पानी का इस्तेमाल करना चाहिए.

  • सनबाथ और गर्म घरों में रहना फायदेमंद होता है. इसीलिए हमें भारी और गर्म कपड़े पहनने चाहिए.

  • ठंडी हवाओं के संपर्क से बचना चाहिए.

  • दिन में सोना नहीं चाहिए और रात में जल्दी सोने की कोशिश करनी चाहिए.

  • धूप में बैठना चाहिए.

इसके साथ ही डॉ अचल इस बात पर जोर देते हैं कि गर्म वातावरण से हमें धीरे-धीरे निकलना चाहिए क्योंकि अचानक सर्द-गर्म भी बीमारी की वजह बनता है.

(ये लेख सिर्फ आपकी सामान्य जानकारी के लिए है. किसी भी सुझाव पर अमल या इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर ले लें.)

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