कुछ फैट अच्छे हैं! गुड और बैड फैट में फर्क समझिए

प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की तरह ही फैट भी जरूरी पोषक तत्वों में से एक है.

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फैट को आमतौर पर मोटापे या बढ़ते वजन, दिल की बीमारियों से जोड़ा जाता है. अगर आपको लगता है कि फैट तो हमारे लिए बुरा होता है और जितना हो सके, इससे परहेज करना जरूरी है, तो ये भी जान लीजिए कि प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की तरह ही फैट भी जरूरी पोषक तत्वों में से एक है.

सिर्फ आपको अच्छे और बुरे फैट में फर्क जानना जरूरी है.

हमें फैट की जरूरत होती है क्योंकि ये शरीर में एनर्जी का मेन सोर्स होता है, स्किन को हेल्दी रखता है, हमारे सेल्स की बाहरी परत (Cell Membrane) बनाने के लिए जरूरी है. फैट शरीर को विटामिन A, विटामिन D और विटामिन E को एब्जॉर्ब करने में मदद करता है.

दरअसल, खाने की चीजों से हमें मुख्य रूप से 3 तरह के फैट मिलते हैं: अनसैचुरेटेड फैट, सैचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट. अनसैचुरेटेड फैट को गुड फैट माना जाता है.

न्यूट्रिशनिस्ट्स के मुताबिक गुड अनसैचुरेटेड फैट जो कि मोनोसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट हैं, इनसे बीमारियों का रिस्क कम होता है. ये दिल के लिए, कोलेस्ट्रॉल लेवल और सेहत के लिए अच्छे होते हैं.

हमारा सबसे बड़ा दुश्मन ट्रांस फैट है. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के मुताबिक ट्रांस फैट वाली चीजें खाने से बैड कोलेस्ट्रॉल (LDL-लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन) बढ़ता है और गुड कोलेस्ट्रॉल (HDL- हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन) घटता है.

इसका संबंध दिल की बीमारियों, स्ट्रोक, डायबिटीज और दूसरी बीमारियों के रिस्क से है.

डेनमार्क, अमेरिका, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और कई देशों में इसके आधिकारिक इस्तेमाल पर पाबंदी है.

लेकिन भारत और दूसरे दक्षिण एशियाई देशों में ट्रांस फैट, खाने की ज्यादातर चीजों में होता है. जैसे वनस्पति-डालडा जिसका ज्यादातर रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड में इस्तेमाल होता है. हम जो पैक्ड चिप्स, नमकीन खाते हैं, उनमें ट्रांस फैट मौजूद होता है.

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन ने साल 2023 तक खाने की चीजों में औद्योगिक रूप से उत्पादित ट्रांस फैट को हटाने का टारगेट रखा है. वहीं सैचुरेटेड फैट रेड मीट, दूध, दूध के प्रोडक्ट्स, चीज़, नारियल का तेल और केक, पेस्ट्री जैसे कई फूड आइटम में होता है.

तो क्या हमें सैचुरेटेड फैट बिल्कुल नहीं लेना चाहिए?

कुछ रिपोर्ट में सैचुरेटेड फैट और हार्ट डिजीज में संबंध बताती हैं. वहीं 21 स्टडी के एक मेटा-एनालिसिस में कहा गया था कि ये निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले कि सैचुरेटेड फैट से दिल की बीमारियों का रिस्क बढ़ता हो, लेकिन ये भी माना गया है कि सैचुरेटेड फैट की जगह पॉलीअनसैचुरेटेड फैट हार्ट डिजीज के रिस्क को कम कर सकती है. इसीलिए एक्सपर्ट्स सैचुरेटेड फैट की मात्रा सीमित करने की सलाह देते हैं.

फैट की वो मात्रा जिसकी आपको जरूरत होती है

  • आपके लिए रोजाना जरूरी कुल कैलोरी में से 20% से 35% कैलोरी फैट से मिलनी चाहिए. फैट की सही मात्रा कैलोरी की जरूरत या वजन मेंटेन करने की जरूरत पर निर्भर करती है.
  • अगर किसी एडल्ट को रोजाना 2000 कैलोरी की जरूरत होती है, तो उसे रोजाना 44-77 ग्राम फैट की जरूरत होगी. इससे ज्यादा फैट से नुकसान होगा.
  • आपको ध्यान रखना है कि ट्रांस फैट बिल्कुल न लिया जाए, सैचुरेटेड फैट सीमित किया जाए और अनसैचुरेटेड फैट (मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट) शामिल किया जाए.

फैट प्लांट और एनिमल दोनों सोर्स से मिल सकता है

  • प्लांट सोर्स- वेजिटेबल कुकिंग ऑयल, मेवा, कोकोनट मिल्क
  • एनिमल सोर्स- दूध, अंडा, घी, मछली, मक्खन, क्रीम

फैटी एसिड के सबसे अच्छे सोर्स- एवोकैडो, ऑलिव ऑयल, मेवा, बीज और फैटी फिश हैं.

इसलिए खाने में ऑलिव ऑयल, मूंगफली का तेल, कैनोला ऑयल (सफेद सरसों का तेल), सूरजमुखी का तेल, कॉर्न ऑयल, फैटी फिश जैसे सैमन, मैकेरल, एवोकैडो, मेवे जैसे अखरोट, बीज जैसे अलसी के बीज शामिल करना अच्छा होगा.

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