COVID-19: क्या है थ्रूपुट टेस्टिंग लैब,जानिए इसके बारे में सबकुछ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जुलाई को देश के तीन शहरों में हाईटेक कोविड टेस्टिंग लैब का उद्घाटन किया है

Updated29 Jul 2020, 12:53 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 जुलाई को देश के तीन शहरों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हाईटेक कोविड टेस्टिंग लैब का उद्घाटन किया. नोएडा, मुंबई और कोलकाता में शुरू किए गए ये लैब हाई थ्रूपुट टेस्टिंग लैब हैं. कोरोना टेस्टिंग की क्षमता बढ़ाने के लिए ये लैब ICMR संस्थानों में स्थापित की गई हैं. तीनों एक साथ रोजाना करीब 10,200 सैंपल टेस्ट कर सकते हैं.

इन लैब की तकनीक ऐसी होती है जिससे लैब स्टाफ को संक्रमित चीजों के संपर्क में आने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कोरोना के अलावा, बाद में इन लैब में हेपेटाइटिस बी और सी, एचआईवी, डेंगू के अलावा दूसरी जटिल बीमारियों की जांच भी की जा सकेगी.

क्या है हाई थ्रूपुट लैब टेस्टिंग, इसकी खासियत? इसके बारे में समझते हैं.

इन लैब में कोबास 6800(COBAS 6800), कोबास(COBAS 8800) मशीन लगाई गई हैं. ये मशीन अप्रैल में विदेश मंत्रालय द्वारा इंपोर्ट कराए गए थे.

एजेंसी IANS के मुताबिक अमेरिका में स्विस फर्म रोश डायग्नोस्टिक्स(Roche Diagnostics) इन मशीनों की मैन्यूफैक्चरर है. भारत ने कोविड-19 के लिए इनसे 6 एसयूवी-साइज की इन हाई स्पीड टेस्ट मशीनों को मंगाया है.

रोश कोबास SARS-CoV-2 टेस्ट विश्वसनीय और हाई क्वॉलिटी रिजल्ट देता है. WHO ने अप्रैल में COVID-19 टेस्ट के लिए इसके इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दी थी. ये मशीन इन-विट्रो (खून,टिश्यू, स्वैब को टेस्ट के तौर पर इस्तेमाल करना), आरटी-पीसीआर टेस्ट तकनीक का इस्तेमाल करती हैं.

रीयल-टाइम रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन पोलीमरेज चेन रिएक्शन (RT-PCR) प्लेटफॉर्म पर संचालित ये SARS-CoV-2 डायग्नोस्टिक टेस्ट इंस्ट्रूमेंट पर वायरस के जेनेटिक सिग्नेचर (RNA) का पता लगाता है. टेस्ट में मरीजों के स्वैब या बलगम से निकाले गए न्यूक्लिक एसिड को एनालाइज किया जाता है, और उनकी तुलना कोरोनोवायरस स्ट्रेन में पाए जाने वाले सिक्वेंस से करते हैं.

ये पूरी तरह से ऑटोमेटिक(स्वचालित) सैंपल प्रिपरेशन पर आधारित है. 6800/8800 सिस्टम को सैंपल की छंटाई या बैचिंग, रि-एजेंट प्रिपरेशन, या चलाने के लिए मैनुअल सेट-अप की जरूरत नहीं होती है. रिजल्ट को सीधे स्क्रीन पर देखा जा सकता है. ऑटोमेशन के कारण लैब कर्मियों की कार्यक्षमता और प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी और टेस्ट में लगने वाले समय में कमी आएगी.

भारत में कहां-कहां लगी हैं मशीनें?

पहले से ही देश में 2 हाई थ्रूपुट COBAS मशीनें हैं- एक एम्स दिल्ली और दूसरी नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) में है.

लेकिन COVID टेस्टिंग के लिए मुंबई में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ रिप्रोडक्टिव हेल्थ (NIRRH), कोलकाता के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कॉलरा एंड एंटरिक डिसीज ( NICED) और नोएडा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (NICPR) लैब में मशीनें लगाई गई हैं.

मशीन की कीमत क्या है?

प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक NIRRH मुंबई ने COBAS 6800 मशीन लगाई है. इसकी कीमत करीब 3.7 करोड़ रुपये है.

NICED कोलकाता के हाई थ्रूपुट लैब में COBAS 8800 मशीन लगाई गई है. इसकी कीमत करीब 5.7 करोड़ रुपये है.

कितनी टेस्टिंग की जा सकेगी?

ये मशीनें साढ़े 3 घंटे में रिजल्ट दे देती है. फर्म का दावा है कि कोबास 6800, 8 घंटे की शिफ्ट में 384 टेस्ट और 24 घंटे में 1536 टेस्ट कर सकता है, जिसमें प्रति रन सिर्फ 3 बार यूजर इंटरैक्शन की जरूरत पड़ती है.

वहीं अपग्रेडेड मॉडल, कोबास 8800, 8 घंटे की शिफ्ट में 960 टेस्ट और 24 घंटे में 4,032 टेस्ट कर सकता है, इसमें भी प्रति रन सिर्फ तीन यूजर इंटरैक्शन की जरूरत पड़ती है.

भारत में फिलहाल जहां-जहां ये मशीनें लगाई गई हैं वो कोरोना से बुरी तरह से प्रभावित इलाके हैं.

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Published: 29 Jul 2020, 11:30 AM IST
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