ऑस्टियोपोरोसिस: जानिए बेहद नाजुक कैसे हो जाती हैं हड्डियां

...कि छींकने-खांसने पर भी होता है बोन फ्रैक्चर खतरा. 

Updated17 Dec 2019, 11:40 AM IST
फिट हिंदी
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हर साल 20 अक्टूबर को वर्ल्ड ऑस्टियोपोरोसिस डे मनाया जाता है ताकि हड्डियों के कमजोर और दर्दनाक फ्रैक्चर का कारण बनने वाली इस बीमारी से बचाव और इसके इलाज को लेकर जागरुकता लाई जा सके.

इंटरनेशनल ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन के मुताबिक दुनिया भर में 50 और इससे ज्यादा उम्र की हर 3 में से 1 महिला और हर 5 में से 1 पुरुष को ऑस्टियोपोरोसिस के कारण फ्रैक्चर का खतरा होता है.

ऑस्टियोपोरोसिस के कारण हड्डियां इतनी कमजोर और नाजुक हो जाती हैं कि गिरने, झुकने या छींकने-खांसने पर भी हड्डियों में फ्रैक्चर होने का खतरा रहता है.

हड्डियों की डेंसिटी कम हो जाती है
हड्डियों की डेंसिटी कम हो जाती है
(फोटो: विकिपीडिया)

द जीन बॉक्स (TGB) के फाउंडर और जनेटिसिस्ट प्रणव अनम बताते हैं, "ऑस्टियोपोरोसिस हड्डियों का एक सामान्य विकार है, जो तेजी से फैलता है. ये भारत की बुजुर्ग आबादी के बीमार होने और उनकी मौत की एक बड़ी वजह है."

ऑस्टियोपोरोसिस महिलाओं में ज्यादा देखने को मिलता है. 65 और इससे ज्यादा उम्र की हर 4 में से 1 महिला ऑस्टियोपोरोसिस से प्रभावित पाई जाती है, वहीं इसी उम्र में हर 20 में से 1 आदमी इससे प्रभावित होता है. 
जनेटिसिस्ट प्रणव अनम

ऑस्टियोपोरोसिस के कुछ रिस्क फैक्टर्स

  • आपका बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 19 kg / m2 से कम होना
  • विटामिन डी की कमी
  • फिजिकली एक्टिव ना होना
  • कैल्शियम की कमी
  • बहुत ज्यादा शराब पीना
  • स्मोक करना
  • आपकी उम्र 60 साल से ज्यादा हो
  • 50 की उम्र के बाद हड्डी टूटी हो
  • आपकी लंबाई घट रही हो (सीधा खड़ा होने की बजाए झुकते जाना)
  • ऑस्टियोपोरोसिस की फैमिली हिस्ट्री
  • जल्दी मेनोपॉज
  • कभी लगातार 12 महीनों के लिए पीरियड्स रुका हो
  • 50 की उम्र से पहले ओवरीज निकाल दी गई हों
  • आप रूमेटाइड अर्थराइटिस का शिकार हों
  • आपको डायबिटीज हो
  • आपको थायराइड की दिक्कत हो

ऑस्टियोपोरोसिस और जेनेटिक फैक्टर्स

जनेटिसिस्ट प्रणव अनम बताते हैं कि सिर्फ आहार में पोषकों की कमी ही ऑस्टियोपोरोसिस की वजह नहीं होती. ये बीमारी माता-पिता से विरासत में भी मिल सकती है.

हाल के रिसर्च में एस्टिमेटेड बोन मिनरल डेंसिटी (eBMD) से जुड़े सैकड़ों आनुवांशिक कारकों की पहचान की गई है. इस तरह के निष्कर्ष ऑस्टियोपोरोसिस की बेहतर और असरदार दवा में बनाने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं. 
जनेटिसिस्ट प्रणव अनम

उनके मुताबिक ऑस्टियोपोरोसिस के शिकार लोगों की पहचान करने में प्रिडिक्टिव जेनेटिक एनालिसिस महत्वपूर्ण हो सकती है और इससे ये निर्धारित करने में भी मदद मिल सकती है कि कोई उपचार कितना प्रभावी हो सकता है. जैसे अगर कोई लैक्टोज इंटॉलरेंट है और कैल्शियम को अवशोषित करने की दर कम है, तो व्यक्ति में बोन लॉस और ऑस्टियोपोरोटिक प्रवृत्तियों से निपटने के उपाय कम जोखिम वाले व्यक्ति से अलग होंगे.

क्या हैं ऑस्टिपोरोसिस से बचाव के उपाय?

  • पौष्टिक आहार लें, जिससे पर्याप्त कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन डी मिल सके
  • विटामिन डी की कमी ना होने दें
  • फिजिकली एक्टिव रहें, एक्सरसाइज करें
  • शराब ना पीएं और धूम्रपान ना करें
  • इसके रिस्क फैक्टर्स को लेकर सतर्क रहें

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Published: 20 Oct 2019, 02:28 AM IST

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