COVID-19 का इलाज ढूंढ रहा ऑक्सफोर्ड का ‘रिकवरी’ ट्रायल कितना सफल?

जानिए क्या है ऑक्सफोर्ड का रिकवरी ट्रायल?

Updated24 Jun 2020, 05:01 AM IST
फिट हिंदी
3 min read

COVID-19 के लिए अबतक किसी तय इलाज या वैक्सीन को मंजूरी नहीं मिली है. लेकिन ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में किया जा रहा ट्रायल बहुत बड़ी उम्मीद है. इसे ‘रिकवरी ट्रायल’ RECOVERY (Randomised Evaluation of COVid-19 thERapY)  का नाम दिया गया है. इसके नतीजे भी दिखने लगे हैं. ट्रायल मार्च में शुरू किया गया था.
इसी ट्रायल के आधार पर कहा जा रहा है कि स्टेरॉयड डेक्सामेथासोन COVID-19 के गंभीर मरीजों के लिए रिस्क घटाने में मददगार हो सकती है.

रिकवरी ट्रायल क्या है?

रिकवरी ट्रायल COVID-19 को लेकर हो रहा दुनिया का सबसे बड़ा ट्रायल है जिसमें ड्रग की क्षमता को परखा जा रहा है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स इसे अंजाम दे रहे हैं. यूके के 176 हॉस्पिटल के 11,500 पेशेंट अबतक इस ट्रायल का हिस्सा हैं.

पेशेंट के अलग-अलग कंट्रोल्ड ग्रुप पर अलग-अलग दवाओं का ट्रायल किया जा रहा है. कंट्रोल्ड ग्रुप ट्रायल का मतलब है पेशेंट के एक ग्रप को दिए जा रहे दवाओं के असर की तुलना उन पेशेंट के ग्रुप से करना जिन्हें ये दवा नहीं दी जा रही.

एक डेटा सेफ्टी मॉनिटरिंग कमिटी इसपर नजर रखती है. नतीजे मिलने तक ये ट्रायल जारी रहता है. अगर नतीजे बेहद अच्छे या बुरे आते हैं तो ट्रायल रोक दिया जाता है.

COVID-19 के मरीजों के लिए ऑक्सीजन सपोर्ट के अलावा 5 अलग-अलग इलाज के तरीकों का ट्रायल जारी है.

अब तक रिकवरी ट्रायल से क्या पता चला है?

स्टेरॉयड दवा डेक्सामेथासोन का कम डोज जीवन रक्षक साबित हो सकता है. ये ट्रायल में शामिल होने वाली पहली दवाओं में से एक थी, इसका इस्तेमाल सूजन संबंधी और फेफड़े की बीमारियों में किया जाता रहा है. और ये सस्ते और आसानी से इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हैं. हालांकि सार्स के दौरान इसके ट्रायल के मिक्स्ड रिजल्ट रहे थे.

  • इसके नतीजे दिखाते हैं कि गंभीर मरीज जो वेंटिलेटर पर थे, उन्हें इसका काफी कम डोज दिया गया और इससे एक तिहाई तक मौतों की संख्या में कमी देखी गई.
  • 8 में से 1 व्यक्ति की जान इस दवा से बचा ली गई.
  • वैसे मरीज जिन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत थी लेकिन वेंटिलेटर की नहीं, वैसे 5 में से 1 मरीज बचाए जा सके.
  • बिना सपोर्ट सांस लेने में सक्षम मरीजों के लिए ये रिकमेंड नहीं किया गया है.

रिकवरी ट्रायल से अबतक और क्या परिणाम सामने निकल कर आए हैं?

रिकवरी ट्रायल के नतीजे हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल को लेकर चल रही खींचतान को सुलझा सकते हैं. हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर ये बात सामने आ रही है कि ये दवा कारगर साबित नहीं हो रही.

डेटा सेफ्टी कमिटी ने इसके ट्रायल पर रोक लगा दी क्योंकि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, प्लेसबो से बेहतर साबित नहीं हो सका. लेकिन संक्रमण को रोकने के लिए दवा का इस्तेमाल अभी भी हो सकता है.

कौन सी अन्य दवाओं का ट्रायल चल रहा है?

रिकवरी ट्रायल के तहत इन दवाओं का इस्तेमाल जारी है.

एचआईवी ड्रग कॉम्बिनेशन लोपिनावीर / रीटोनावीर, जिसे ब्रांड कालेट्रा के नाम से जाना जाता है, इनका ट्रायल जारी है.

इसके अलावा एजिथ्रोमाइसिन है, जो आमतौर पर इस्तेमाल किया जाने वाला एंटीबायोटिक है और फ्रांस में कुछ मरीजों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के साथ दिया गया.

ट्रायल में जोड़ा गया सबसे नया ड्रग टोसिलिजुमाब है, जिसके इंजेक्शन दिए जाते हैं.

इन सबके परिणाम भी जल्द पब्लिक के सामने लाए जाएंगे. इसके अलावा कंवलसेंट प्लाज्मा ट्रीटमेंट को भी ट्रायल के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है.

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Published: 23 Jun 2020, 01:26 PM IST

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