क्या है पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर? जानिए इसके लक्षण
PTSD से ग्रस्त इंसान अलग-थलग रहने लगता है. 
PTSD से ग्रस्त इंसान अलग-थलग रहने लगता है. 

क्या है पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर? जानिए इसके लक्षण

मैं महसूस कर सकती थी कि कुछ तो गलत हो रहा है, जब कुछ अनपेक्षित चीजें होना शुरू हुईं, मैं उन चीजों से किनारा करने लगी जो मुझे पसंद हुआ करती थीं.

मदद का हाथ बढ़ाने वाले किसी भी शख्स पर भरोसे की कमी की वजह से वर्षों के एकाकीपन के बाद, जब मनोचिकित्सक ने मेरी रिपोर्ट सौंपी, तब पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) और एंग्जाइटी डिसऑर्डर का पता चला.

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क्या है पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD)?

पोस्ट ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) एक मनोरोग है, जो उन लोगों को हो सकता है जिन्होंने प्राकृतिक आपदा, गंभीर दुर्घटना, आतंकवादी हमला, किसी प्रियजन की अचानक मौत, युद्ध, हिंसक व्यक्तिगत हमले जैसे बलात्कार, बाल शोषण या जीवन को खतरे में डालने वाली दूसरी घटनाओं का सामना किया है.

हालांकि इन बीमारियों से पीड़ित अपनों को मदद की पेशकश करना वाकई अच्छा है, लेकिन जो पेशकश की जाती है उसे कुबूल करने के लिए उन्हें मजबूर करना या उम्मीद करना ठीक नहीं है. ऐसा कोई भी दबाव उनके डर और चिंता बढ़ाएगा और नतीजतन उन्हें अप्रत्याशित परिस्थिति में सभी से अलगाव पर मजबूर करेगा. आखिकार वे अंतर्मन के भावनात्मक तूफान का सामना कर रहे होंगे.

PTSD होने पर कैसा महसूस होता है?

ऐसा महसूस होता है कि बीते कल का दर्द आपके आज को भी निगल जाएगा.
ऐसा महसूस होता है कि बीते कल का दर्द आपके आज को भी निगल जाएगा.
(फोटो: Unsplash.com)

आपको ये समझाने के लिए कि PTSD में कैसा महसूस होता है, यहां इसके असर के बारे में संक्षेप में बताया जा रहा है.

ऐसा लगता है कि कोई चीज दिल में सुराख कर रही है. आपको इस बात का कोई अंदाजा नहीं होता कि कौन सी चीज इसकी शुरुआत का कारण बन सकती है. यह एक गेंद की तरह है, जो आपके शरीर के अंदर फूल रही है और पूरी जगह घेरते हुए आपका दम घोंट देगी. ऐसा लगता है कि आपको एकदम छोटे से कमरे में कैद कर दिया गया है, जिसमें हवा आने-जाने के लिए खिड़की भी नहीं है. बीते हुए कल का दर्द आपके आज, आने वाले कल और बाकी बची पूरी जिंदगी को अपनी आगोश में ले लेगा.

यह सब मैंने निजी अनुभव के आधार पर बयान किया है. लेकिन मेडिकल की भाषा में कहें तो, इसके लक्षण ये हैं:

  1. सदमे वाली घटना को बार-बार अनुभव करना- पूरे विस्तार के साथ घटना की यादें, फ्लैशबैक, बुरे सपने या घटना के बारे में याद दिलाने पर तीव्र प्रतिक्रिया जताना.
  2. टालने की कोशिश करना और खामोशी अख्तियार कर लेना- ऐसी किसी भी चीज से बचना, जो आपको सदमे की याद दिलाती है. मुश्किल हालात को याद करने में असमर्थ होना, गतिविधियों और जिंदगी में रुचि ना रह जाना, भावना-शून्य हो जाना व अलग-थलग महसूस करना और कोई भविष्य नहीं होने की भावना.
  3. जरूरत से ज्यादा सजगता- नींद की समस्या, चिड़चिड़ापन, बहुत ज्यादा सतर्कता, अस्थिर महसूस करना, किसी भी बात पर चौंक जाना, गुस्से में फट पड़ना, खुद को नुकसान पहुंचाने या लापरवाही का बर्ताव.
  4. नकारात्मक विचार और मूड में बदलाव- अलग-थलग या एकाकीपन की भावना, ध्यान केंद्रित करने या याद करने में कठिनाई, डिप्रेशन, भरोसे की कमी, अपराध-बोध, शर्मिंदगी या खुद को जिम्मेदार मानना.

एकाकीपन का कारण

कोई भी वास्तव में PTSD से पीड़ित व्यक्ति द्वारा महसूस किए गए दर्द का आधा हिस्सा भी नहीं जान पाता है.
कोई भी वास्तव में PTSD से पीड़ित व्यक्ति द्वारा महसूस किए गए दर्द का आधा हिस्सा भी नहीं जान पाता है.
(फोटो: Unsplash.com)

PTSD से पीड़ित व्यक्ति के दिमाग में बहुत कुछ चल रहा होता है, यही कारण है कि किसी को भी इस बारे में सावधान रहना चाहिए कि अपने करीबी शख्स को क्या नहीं कहना चाहिए. लोग मदद करना चाहते हैं, लेकिन इसके साथ ही वे उम्मीद करते हैं कि PTSD से पीड़ित व्यक्ति भी उनकी भावना को समझे, जो कि हद दर्जे की नादानी है, और बीमार के साथ बहुत ज्यादती है.

जो लोग वास्तव में मेरे करीबी थे, वे मुझे लगातार बताते रहते कि मैं क्या करूं, इसलिए मैंने उन्हें अपनी जिंदगी से अलग करना शुरू कर दिया. मैंने तय किया कि अकेली ही बाहर जाऊंगी और अपने सभी डर और चिंताओं को मारने के लिए ड्रिंक पर ड्रिंक लूंगी और कैंडी खाऊंगी.

“आप अपनी तरफ से पूरी कोशिश नहीं कर रही हैं” से लेकर “आप दुनिया की सबसे ना शुक्रगुजार और स्वार्थी इंसान हैं”, ऐसी बातें मुझे नियमित रूप से सुनने को मिलती थीं. और अंत में यही हुआ कि, मैं चाहने लगी कि मेरे आसपास कोई भी न हो, इसलिए मैंने उन हालात और लोगों से किनारा करना शुरू कर दिया, जिसमें किसी भी तरह की सफाई देने की जरूरत थी.

मैं दोस्तों और परिवार, उनकी कॉल, मैसेज वगैरह हर चीज से बचने के रास्ते तलाशने लगी थी.

अलग-थलग पड़े शख्स के साथ कैसे पेश आएं? कुछ बुनियादी बातें

अपने प्रियजनों को ठीक करने की प्रक्रिया में आप अपने आप को भी ठीक करते हैं.
अपने प्रियजनों को ठीक करने की प्रक्रिया में आप अपने आप को भी ठीक करते हैं.
(फोटो: iStock)
  1. अपने प्रियजन पर बात करने के लिए दबाव न डालें, उन्हें बताएं कि जब वो बात करना चाहें तब आप उन्हें सुनने के लिए तैयार हैं. उनके साथ ऐसा व्यवहार कतई ना करें जैसे कि उन्हें खास देखभाल की जरूरत है.
  2. समर्थन और साथ देने के तरीके खोजें.
  3. सब्र रखें.
  4. जब आप उनकी देखभाल करते हैं तो अपने स्ट्रेस मैनेजमेंट का भी ख्याल रखें. अगर आप अपने लिए ऐसा नहीं कर सकते हैं, तो आप किसी का ख्याल नहीं रख सकते.
  5. बेहतर समझ हासिल करने के लिए PTSD के बारे में ज्यादा से ज्यादा पढ़ें.
  6. सुनें! बीमार लोग सुनने के लिए तरस रहे हैं.
  7. उन्हें सुरक्षा और भरोसा दोबारा हासिल करने में मदद करें.
  8. उन्हें पूरी आजादी दें जिसकी उन्हें जरूरत है.

यह PTSD से पीड़ित व्यक्ति और उनके प्रियजनों के लिए भावनाओं के भारी उतार-चढ़ाव का सफर है, लेकिन सभी जरूरी मदद का साथ हो तो, यह सफर भी कट जाएगा.

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