कोरोनावायरस से डर के बीच बच्चों को कैसे रखें सुरक्षित और सतर्क?
स्कूल बंद होने के बाद बच्चों को शांत और सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?
स्कूल बंद होने के बाद बच्चों को शांत और सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?(फोटो: iStock)

कोरोनावायरस से डर के बीच बच्चों को कैसे रखें सुरक्षित और सतर्क?

जब मैंने अपनी 10 साल की बेटी को बताया कि अब, मैं उसे स्कूल नहीं भेजूंगी तो उसका जवाब था, 'बस, आप चाहती नहीं हैं कि मैं मजे करूं.' मैं बिल्कुल हैरान थी कि क्या मुझे उसके गुस्सा होने पर डांटना चाहिए या स्कूल को मजा कहने के लिए उसकी तारीफ करनी चाहिए.

एक हेल्थ एडिटर के रूप में, दुनिया भर से रिपोर्ट / डेटा / स्टडी देखते हुए, मुझे अभी भी यकीन नहीं है कि स्कूलों को क्या कदम उठाने चाहिए. जहां हम रहते हैं, यूपी सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्कूल बंद करने के लिए कहा है. ऐसे में पास के राज्यों दिल्ली और हरियाणा में स्कूलों को बंद करने का फैसला लिया गया है. अब कर्नाटक, ओडिशा और दूसरे राज्य भी इस लिस्ट में शामिल हो गए हैं.

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क्रिटिकल केयर स्पेशलिस्ट और क्विंट फिट के एडवाइजर डॉ सुमित रे के साथ मेरी बातचीत में, डॉक्टर ने कुछ ऐसा कहा जो फाइनली मुझे निर्णय लेने के लिए प्रेरित करता है.

हम जानते हैं कि नोवल कोरोनोवायरस कहीं न कहीं बच्चों के लिए उतना गंभीर नहीं है. 9 साल से कम उम्र के बच्चों में इसके बहुत कम मामले सामने आए हैं. वास्तव में, जिनमें ये संक्रमण पाया गया है, उनमें इसके लक्षण हल्के होते हैं.

तो क्या स्कूल बंद करना किसी उद्देश्य की पूर्ति करता है?

डॉ रे कहते हैं, "ठीक है कि बच्चों में बेहतर इम्युनिटी होती है और उस मजबूत इम्यून सिस्टम के साथ, वे किसी तरह इस वायरस पर हल्का रिएक्ट कर रहे हैं.

लेकिन बीमारी के भले ही हल्के मामले सामने आए हों, वे तब भी रोग के वाहक बने रहते हैं. वे बुजुर्ग दादा-दादी और कमजोर रेस्पिरेटरी सिस्टम वाले दोस्तों तक इस बीमारी को पहुंचा सकते हैं.

हम घर में बहुत बीमार दादा-दादी के साथ रहते हैं, जिन्हें आईसीयू-लेवल के होम केयर की आवश्यकता होती है. हम जिस शहर में रहते हैं, वहां कोरोनवायरस के कुछ मामले सामने आए हैं. हम उन दोस्तों के साथ बातचीत करते हैं, जो हाल ही में उन देशों में गए हैं, जहां से कोरोनोवायरस के मामले सामने आए हैं.

हम एक ऐसे समाज में रहते हैं जहां लोग नियमित रूप से यात्रा करते हैं और कुछ ऐसे रोगी के संपर्क में आ सकते हैं, जिनकी टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई है. यह सब देखने-जानने के बाद, क्या हमें अभी भी बच्चों को स्कूल भेजना चाहिए? और अगर हम स्कूल बंद करते हैं, तो स्पोर्ट्स, म्यूजिक क्लास, थिएटर और पार्क टाइम के बारे में क्या, जहां बच्चे अपना बाकी का समय बिताते हैं. खेलने के टाइम के बारे में क्या? (ठीक है, मैं स्कूल नहीं जाऊंगा अगर आप मुझे खेलने के लिए जाने दें!)

मैं आप के लिए इन सवालों का जवाब देने की कोशिश करती हूं.

स्कूल बंद करना

अगर आप उन शहरों में रहते हैं जहां COVID-19 के मामले सामने आए हैं, और 'कम्युनिटी वाइड' ट्रांसमिशन की पुष्टि की गई है, तो जिला प्रशासन स्थिति का जायजा लेगा और स्कूल बंद करने के लिए कहेगा.

फिलहाल जो रिपोर्ट हैं उनमें भारत में कम्युनिटी वाइड ट्रांसमिशन नहीं है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने 12 मार्च को स्पष्ट किया था कि भारत में केवल 'लोकल ट्रांसमिशन' केस की रिपोर्ट है. मतलब, ज्यादातर केस बाहर से आए हैं, और इन बाहर से आए मामलों का पता लगाया गया है. संक्षेप में, ऐसे कोई मामले नहीं हैं जहां कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग असफल रही हो.

अगर आपके जिला प्रशासन ने स्कूल बंद करने के लिए नहीं कहा है, तो संभावना है कि वह नहीं मानते हैं कि इसके कम्युनिटी वाइड फैलने का वास्तविक खतरा है. अगर आपके शहर, आपके जिले में कोरोनावायरस के मामले नहीं हैं, तो स्कूल खुले रह सकते हैं.

थिएटर, म्यूजिक, स्पोर्ट्स क्लास

अधिक सावधानी बरतने का हिस्सा बनते हुए मेरे बच्ची के थिएटर क्लास को जब दो हफ्ते तक बंद करने का फैसला लिया गया, तो हमारे घर में सीन क्रिएट हो गया. यह शेक्सपीयर के उस थिएटर की तरह था, जिसकी तैयारी बच्चे अपने लोकल प्रोडक्शन के लिए कर रहे थे. क्लासेज उस समय बंद की गई जब उस स्कूल में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के बच्चे के पेरेंट की टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई.

इस तरह की स्थिति में अत्यधिक सावधानी ठीक है और दो हफ्ते के लिए क्लासेज कैंसिल करने को 'दुनिया खत्म होने' के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए.

हमने विस्तार से बताया है कि 'कोरोनावायरस के फ्लैटनिंग' कर्व का मतलब क्या है. यह अनिवार्य रूप से कहता है कि शॉर्ट टर्म में कड़े प्रतिबंधात्मक कदम उठाने से, इसके फैलने में देरी और किसी देश के हेल्थ सिस्टम को तैयारी करने के लिए पर्याप्त समय देने में मदद मिलेगी.

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सिनेमा हॉल, मॉल

एक मीटर की दूरी बनाए रखना और सोशल आइसोलेशन, कोरोनोवायरस को दूर रखने के दो आधार हैं.

सिनेमा हॉल और मॉल का जो स्वरूप है, वहां एक निश्चित जगह में बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. यही कारण है कि भारत के विभिन्न शहरों में सिनेमा हॉल बंद हो गए हैं.

अगर आपके शहर में पॉजिटिव केस हैं और सिनेमा हॉल को बंद करने का आदेश नहीं दिया गया है, तो पर्सनल हाइजीन प्रैक्टिस में लाएं, सैनिटाइजर ले जाएं, सीट और आर्म्स रेस्ट को एंटी-बैक्टीरियल वाइप्स से साफ करें. किसी भी स्थिति में भीड़भाड़ से बचें.

बर्थडे पार्टीज

कई बच्चों के बर्थडे की पार्टियों को हाल ही में कैंसल कर दिया गया है. इसमें मेरे बच्चों की मेरे खिलाफ शिकायतों की लिस्ट भी शामिल है. (हां, आपके बच्चे पर्सनली दुनिया में हो रही हर गलत चीज के लिए आपको दोषी ठहराएंगे, इसे स्वीकार करें).

इनमें से कुछ पार्टियों को प्लेरूम में शेड्यूल किया गया है, जो पूरे शहर में देखने को मिल रहे हैं.

यह एक समझदारी भरा निर्णय है.

कुछ ने घरों में कम संख्या में बच्चों के साथ पर्सनल पार्टी करने का फैसला किया है. मैंने अपने छोटे बच्चे को एक ऐसी ही पार्टी में भेजा था. ये छोटी गैदरिंग हैं, जहां आप लोगों को जानते हैं, उनकी हिस्ट्री को जानते हैं और हाइजीन को लेकर आश्वस्त हैं.

अगर आप उन शहरों में हैं, जहां केस सामने आए हैं, तो पब्लिक प्लेस पर बर्थडे की बड़ी पार्टियों से बचें.

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पार्क टाइम

हर घर पर रहने, वर्क फ्रॉम होम करने वाले पेरेंट्स की सबसे बड़ी खुशी शाम लगभग 5 बजे होती है जब बच्चे अपने दोस्तों के साथ पार्क में खेलने के लिए घर से बाहर निकलते हैं.

मैंने अपने बच्चों को अभी तक इस आनंद से रोका नहीं है. लेकिन कई पेरेंट्स ने पार्क टाइम के दौरान बच्चों को घर पर रहने के लिए कहा है और यह ठीक भी है. स्विंग सेट्स और स्लाइड्स ऐसी जगहें हैं जहां से वायरस फैलते हैं.

अगर आप अपने बच्चों को पार्क भेजने का प्लान कर रहे हैं, तो उन्हें वाइप्स और सैनिटाइजर देकर भेजें. संभावना है, वे उनका बिल्कुल भी यूज नहीं करेंगे. लेकिन जब वे घर आते हैं, सुनिश्चित करें कि वे अपने हाथ अच्छे से धोएं.

बच्चों को जानकारी दें, उन्हें चिंतित न करें

एक अधिक जानकारी वाले पेरेंट (काम के खतरे) के रूप में मैं अपने बच्चों से कोरोनोवायरस के बारे में बहुत बातें करती हूं.

मैं अपनी जानकारी शेयर करने में जिम्मेदार होने का प्रयास करती हूं लेकिन अक्सर पेरेंट्स के रूप में, हमें यह एहसास ही नहीं होता कि कब हम अपनी चिंताओं को अपने बच्चों पर डाल देते हैं.

मुझे एहसास हुआ कि मेरी बेटी अपने दादा-दादी के पास जाने से बच रही थी, जब तक उसने मुझे बताया कि उसे डर था कि उससे दादा-दादी को इन्फेक्शन हो सकता है. यह उसकी ओर से एक समझदारी भरा निर्णय था. वो अब चिंतित है.

मैं यह सुनिश्चित करना चाहती हूं कि यह चिंता का कारण न बने. अब जब स्कूल बंद हो गए हैं, यह माता-पिता और बच्चों के लिए एक कड़ा संतुलन बनाने वाला काम है. अधिकतर माता-पिता काम पर जाना और घर से बाहर निकलना जारी रखेंगे, जबकि अपने बच्चों को ऐसा नहीं करने के लिए कहेंगे.

ऐसे समय में बच्चों कुछ एक्स्ट्रा पढ़ने का समय, कंप्यूटर का एक्स्ट्रा समय दें, उन्हें बोर्ड गेम और कुछ भी नहीं करने की खुशियों से परिचित कराएं और उन्हें सुरक्षित रखें.

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